इस समय भाजपा का जोर यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव पर है। एक रणनीति के तहत यूपी के चुनाव में हरियाणा के मंत्रियों से लेकर विधायकों और पार्टी पदाधिकारियों तक का सहारा लिया जाएगा। यूपी में जिस जाति का जिस क्षेत्र में दबदबा होगा, वहां उसी बिरादरी के नेता को मुद्दों के बारे में तैयारी कराकर उतारा जाएगा। इस संबंध में हाईकमान ने नेताओं के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी है। ऐसे नेताओं को आगे होने वाली सभी चुनावी बैठकों में शामिल किया जाएगा।
यूपी में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इस संबंध में सभी सियासी दलों ने अपनी राजनीतिक बिसात बिछनी शुरू कर दी है। भाजपा ने यूपी चुनाव के लिए नई रणनीति तैयार की है। इसके तहत हर प्रदेश से ऐसे मंत्रियों, विधायकों और पदाधिकारियों को तैयार किया जाएगा, जिनके सहारे यूपी में वोटरों को लुभाया जा सके। इन सभी को वहां बिरादरी के आधार पर भेजा जाएगा। मसलन, जहां जिस जाति के वोटर अधिक होंगे, वहां उसी बिरादरी के नेता को भेजा जाएगा। हरियाणा के मंत्री, विधायक और अन्य नेताओं को वेस्ट यूपी के उन जिलों में फिट किया जाएगा जो हरियाणा की सीमा से सटे हैं।
प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला, उपाध्यक्ष राजीव जैन समेत कई नेता तो पहले भी चुनाव के सयम यूपी जा चुके हैं। वहीं, केंद्रीय मंत्री बिरेंद्र सिंह वेस्ट यूपी का दौरा करते रहते हैं। इसलिए इन सभी को जिम्मेदारी मिल सकती है। सूत्रों के अनुसार भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की दिल्ली में सीएम मनोहर लाल खट्टर के साथ बातचीत में इस पर विस्तार से चर्चा हुई है। अब नेताओं के नाम जल्द ही फाइनल करके भेजने हैं, जिससे आगे होने वाली चुनावी मीटिंगों में यह नेता शामिल हो सकें। हरियाणा में जाटों की मांगों को पूरा करके यशपाल मलिक व अन्य जाट नेताओं का सहारा भी भाजपा यूपी चुनाव में ले सकती है।