जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान प्रदेश में हुए दंगों को लेकर कांग्रेस नेताओं के सरकार पर हमले लगातार जारी हैं। यह हमला प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट में डीजीपी और गृह सचिव की लापरवाही सामने आने के बाद ज्यादा तेज हो गया है। सोमवार को कांग्रेस के पूर्व गृहमंत्री सुभाष बत्तरा ने सीएम मनोहर लाल खट्टर का नैतिकता के आधार पर इस्तीफा ही मांग लिया।
पत्रकारों से बातचीत में पूर्व गृहमंत्री सुभाष बत्तरा ने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था बनाने में सरकार नाकाम साबित हो रही है। जिसका सबसे बड़ा उदाहरण फरवरी में हुए दंगे हैं, जिसमें सबसे ज्यादा कानून की धज्जियां उड़ी। सरकार की नाकामी की सच्चाई उस समय सामने आ गई, जब प्रकाश कमेटी की रिपोर्ट में पुलिस व गृह विभाग के अधिकारियों की लापरवाही बताई गई। इन सभी की जिम्मेदारी खुद सीएम के पास है इसलिए सीधे तौर पर उनकी लापरवाही है। उन्होंने कहा कि आम जनता भी खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है। इस समय प्रदेश में भय का माहौल है, जिसे भाजपा सरकार दूर नहीं कर पा रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब आम आदमी ही सुरक्षित नहीं है तो विकास की बात बहुत दूर हो जाती है।