बाबा मस्तनाथ मठ में कलश स्थापना समारोह के साथ देशमेले की तैयारी पूरी हो चुकी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समारोह में शिरकत करेंगे, मठ में दो दिन भाजपा के दिग्गज नेता पहुंचेंगे।
हरियाणा के रोहतक में सप्तम महंत पीर चांदनाथ योगी के आठमान भंडारे, शंखढाल, मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा एवं देशमेले से एक दिन पूर्व ही बाबा मस्तनाथ मठ में भक्तिमय माहौल नजर आया। बाबा मस्तनाथ की पुनर्निर्मित समाधि (मंदिर) पर मंगलवार को कलश स्थापना हुई। आठ गांवों की करीब 3000 महिलाएं अपने सिर पर कलश धारण कर समाधि स्थल पहुंचीं। मठ के महंत बाबा बालकनाथ योगी ने समारोह की तैयारियों का जायजा लिया।
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सिद्ध चौरंगीनाथ ने आठवीं शताब्दी में की थी अस्थल बोहर मठ स्थापना
बाबा मस्तनाथ मठ संपूर्ण विश्व की संत परंपरा में नाथ संप्रदाय का अद्वितीय स्थान है। आदिनाथ भगवान शंकर इस संप्रदाय के प्रवर्तक हैं। आठवीं शताब्दी के प्रसिद्ध ग्रंथ ''हर्षचरित'' व इससे पूर्ववर्ती ग्रंथ कादंबरी, मैत्रेयी उपनिषद् और पुराणों में भी कनफड़ा योगियों के उल्लेख मिलते हैं। लोकहित के कार्यों के कारण ही वर्तमान समय में नाथ संप्रदाय अफगानिस्तान, तिब्बत व चीन तक फैला है।
तिब्बत के तंजूर मठ व चीन के बौद्ध विहारों में सिद्ध संप्रदाय के अनेक सिद्धों की कीर्ति गाथाएं वर्तमान में भी सुरक्षित हैं। उत्तर भारत में लोकगीत, सांग, किस्से और कहानियां इस बात को प्रमाणित भी करते हैं। गुरु परंपरा का निर्वहन करते हुए सिद्ध चौरंगीनाथ ने आठवीं शताब्दी में अस्थल बोहर मठ की स्थापना की।
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सिद्ध बाबा चौरंगीनाथ ने अपनी अखंड साधना, कठोर तप, अद्भुत एवं अलौकिक योग माया से मठ की महिमा को दसों दिशाओं में फैलाया। कालक्रम से विध्वस्त हुए मठ का 18वीं शताब्दी में पुनः जीर्णोद्धार बाबा मस्तनाथ ने कराया। भगवान गोरक्षनाथ के अवतार थे।