हरियाणा के रोहतक में पीजीआईएमएस फिर चर्चा में है। इस बार मामला अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट से जुड़ा है। संस्थान से महज 12 घंटे में दो जांचें कराईं। इनमें से एक रिपोर्ट सामान्य तो दूसरी ने गुर्दे में पथरी की पुष्टि की। इन अलग-अलग रिपोर्ट को लेकर मरीज आहत हैं।
यही नहीं, मरीज अपने दस्तावेज लेकर इध-उधर भटकने के लिए विवश है। चिकित्सक के लिए भी इलाज को लेकर असमंजस की स्थिति बन रही है। इधर, संस्थान की ओर से तकनीकी गलती करार देते हुए परिस्थिति के हिसाब से जांच रिपोर्ट मिलने का दावा किया है।
दरअसल, पीजीआईएमएस के ट्रामा सेंटर में 13 अक्तूबर की रात करीब साढ़े दस बजे दिल्ली से एक लड़की को भर्ती कराया गया। उसके पेट में दर्द था। यहां उसका अल्ट्रासाउंड कराया गया। रिपोर्ट में सब कुछ सामान्य बताया गया। मरीज को दर्द की शिकायत के चलते इंजेक्शन लगा दिया गया। इसके बावजूद दर्द कम नहीं हुआ।
रात भर यह मरीज दर्द से तड़पती रही। अगले दिन सुबह ओपीडी में मरीज को दिखाया तो यहां डॉक्टर ने दोबारा अल्ट्रासाउंड कराने को कहा। इस बार रेडियोलॉजी विभाग में अल्ट्रासाउंड हुआ। इसमें गुर्दे में पथरी होने पुष्टि हुई। इस रिपोर्ट को देखकर डाॅक्टर भी चौंक गए। चिकित्सक किस रिपोर्ट को सही मानें और किसे नहीं, इस पर भी असमंजस की स्थिति बन गई
एक ही कर्मचारी कर रहा दो काम
ट्रामा सेंटर में कर्मचारियों की कमी से वर्कलोड बना हुआ है। यहां 13 अक्तूबर की रात को भी एक ही कर्मचारी तैनात था। यही कर्मचारी सीटी स्कैन भी कर रहा था और अल्ट्रासाउंड भी। इस कर्मचारी ने पहले दो अल्ट्रासाउंड व फिर दो सीटी स्कैन किए। इसी हिसाब से यह काम करता रहा। ऐसे में ज्यादातर मरीजों की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट सामान्य बताई गई। जबकि वे किसी न किसी परेशानी से घिरे थे।
संस्थान में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रही हैं। यहां बेहतर उपकरण व योग्य कर्मचारी हैं। अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट अलग होना स्वाभाविक है। यह व्यक्ति-व्यक्ति पर या परिस्थिति पर निर्भर करता है। किसी व्यक्ति के खाली पेट होने, खाना खाने, पानी पीने या नहीं पीने की स्थिति में रिपोर्ट प्रभावित हो सकती है। फिर भी कहीं कोई कमी है तो उसे दूर किया जाएगा। मरीजों को किसी तरह की परेशानी नहीं आने दी जाएगी।
-डॉ. कुंदन मित्तल, चिकित्सा अधीक्षक, पीजीआईएमएस।