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18 करोड़ का प्रोजेक्ट : तीन साल बाद रोजी-रोटी की जगह चल रहा हथौड़ा

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शहर के बहुचर्चित एलीवेटेड रेलवे ट्रैक के विस्थापितों को तीन साल बाद भी दुकानें नहीं मिल सकी हैं। पावर हाउस चौक पर 18 करोड़ की लागत से तैयार दुकानों में कारोबार की जगह अब हथौड़ा चल रहा है। क्योंकि नगर निगम ने पहले दुकानों का साइज 12 गुणा 9 फुट तक किया। फिर उसमें 6 फुट बरामदा भी जोड़ दिया। अब बरामदा तोड़ा जा रहा है। परेशान पार्षद, व्यापारी नेता व विस्थापित दुकानदार वीरवार को छुट्टी के दिन नगर निगम कार्यालय में नगर निगम के सीनियर डीटीपी कृष्ण कुमार वार्ष्णेय से मिले और तकनीकी तौर सलाह ली। जल्द विस्थापित दुकानदार पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर के साथ सीएम मनोहर लाल से मिलेंगे।
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वर्ष 2018 में प्रदेश सरकार व रेलवे ने मिलकर प्रदेश के पहले एलीवेटेड ट्रैक का निर्माण कार्य शुरू किया। इसके जद में आए गांधी कैंप के 33 लोगों की दुकानें व मकान तोड़े गए। इस दौरान तय किया गया था कि विस्थापित लोगों को पावर हाउस चौक पर दुकानें दी जाएंगी, जबकि पीजीआईएमएस से जगह लेकर मकान दिए जाएंगे। निगम ने इसके लिए 18 करोड़ का प्रोजेक्ट तय किया था। प्रोेजेक्ट के तहत विस्थापित दुकानदारों के लिए पावर हाउस चौक पर दुकानें बनकर तैयार हो चुकी हैं, लेकिन एक तकनीकी पेच ने अधिकारियों की नींद उड़ा रखी है। क्योंकि पहले तय हुआ था कि दुकानदारों को 12 गुणा 9 साइज की दुकान दी जाएं। निगम दुकानों की छत नहीं देगा। नक्शा बनकर तैयार हो गया और ठेकेदार ने दुकानों को निर्माण कर दिया। इसी बीच दुकानदार बिना छत दुकान लेने के लिए तैयार नहीं हुए। तय हुआ कि दुकानों के आगे के 6 फुट के बरामदे को भी दुकानों के साथ जोड़ दिया जाए। इस तरह दुकानदार 18 गुणा 9 फुट की दुकान लें, लेकिन इसके लिए कलेक्टर रेट पर निगम लागत राशि लेगा। अब पहले से लंबी दुकानें बनकर तैयार हो गई, लेकिन अब सवाल उठा कि दुकानदारों से कलेक्टर रेट पर राशि लेना उचित नहीं है। अब तकनीकी फाल्ट बताकर 6 फुट लंबे बरामदे को दुकानों से तोड़कर अलग कर दिया गया है।
अधिकारियों ने बिना पूछे बना दिया एजेंडा, पार्षद नया लेकर आएंगे
मामले को लेकर विस्थापित दुकानदार, व्यापारी नेता राजेश लुंबा व निगम पार्षद राधेश्याम ढल के साथ छुट्टी के दिन निगम कार्यालय पहुंचे, जहां वरिष्ठ नगर योजनाकार कृष्ण कुमार वार्ष्णेय से मिले। तकनीकी तौर पर उनसे सलाह ली गई। तय हुआ कि कलेक्टर रेट की शर्त व मेन रोड की तरफ की दुकानों का 10 प्रतिशत अतिरिक्त प्रीमियम लेने का प्रस्ताव उचित नहीं है। इस प्रस्ताव की जगह हाउस में दुकान के बदले दुकान व अतिरिक्त जगह कलेक्टर रेट का प्रस्ताव रखा जाएगा। इसके बाद प्रस्ताव को सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
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विस्थापित दुकानदारों के साथ अन्याय नहीं होने देंगे। जो विस्थापित दुकानदारों के हित में होगा, वहीं निर्णय लिया जाएगा। इसके लिए अधिकारियों व पार्षदों से बात की गई है। पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर के साथ सीएम से मिलेंगे। इसके लिए समय लिया गया है।
- राजेश लूंबा, व्यापारी नेता
नगर निगम प्रशासन ने बगैर पूछे विस्थापित दुकानदारों के पुनर्वास का प्रस्ताव रख दिया, जिसमें 10 प्रतिशत प्रीमियम की शर्त भी जोड़ी गई है, जो मंजूर नहीं है। अब हाउस में नया प्रस्ताव लाया जाएगा।
- राधेश्याम ढल, निगम पार्षद, वार्ड-14
प्रदेश सरकार विस्थापित दुकानदारों का दर्द समझे। इसके लिए दुकान के बदले दुकान दी जाए। कलेक्टर रेट की शर्त नहीं लगानी चाहिए। क्योंकि तीन साल से दुकानदार रोजी-रोटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। हाउस में इस प्रस्ताव पर जोर दिया जाएगा।
- अशोक खुराना, पार्षद पति, वार्ड-13
पावर हाउस चौक पर पहले 12 गुणा 9 फुट साइज की दुकानें बनाई गई थी। बाद में 6 फुट लंबा बरामदा भी जोड़ दिया गया। वह तकनीकी तौर पर उचित नहीं है। ऐसे में बरामदे को हटाया गया है। अब हाउस जो प्रस्ताव पास करेगा, उसे सरकार के पास मंजूरी के लिए भेज देंगे।
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- नरहरि बांगड़, आयुक्त, नगर निगम
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