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हरियाणा की राजनीति: हुड्डा के गढ़ में भाजपा का मनोहर दांव, दूसरे कार्यकाल में सीएम का रोहतक में पहला जनसंवाद

Sat, 30 Sep 2023 11:25 AM IST
नवीन दलाल विजेंद्र कौशिक, रोहतक (हरियाणा)

सार

रोहतक शहर आजादी के बाद से अब तक भाजपा के पितामह कहे जाने वाले डॉक्टर मंगलसेन और कांग्रेस के बतरा बंधुओं की जीत का गवाह रहा है। लेकिन रोहतक शहर के अंदर मुख्यमंत्री मनोहर लाल पहला जनसंवाद चार हलकों में से शहर के लिए अहम रहेगा। जिसके चलते सबकी नजरें इस पर है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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हरियाणा की सियासी राजधानी में इन दिनों गतिविधियां काफी बढ़ गई हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की लगातार सक्रियता के जवाब में भाजपा भी मनोहर दांव चलाने जा रही है। अपने दूसरे कार्यकाल में शनिवार को रोहतक शहर के अंदर मुख्यमंत्री मनोहर लाल पहला जनसंवाद करेंगे। सिरसा जैसा कोई असंभावित प्रकरण न हो, इसके लिए प्रशासन के साथ-साथ भाजपाई सतर्क हैं। ऐसे में शिकायतकर्ताओं का चयन भी दिलचस्प रहेगा।

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भाजपा की ओर से खुद मुख्यमंत्री मैदान में आए
जिले के चार हलकों में से रोहतक शहर अहम है। यहां शत-प्रतिशत शहरी मतदाता है। ताऊ देवीलाल के दौर से लेकर अब तक लोकसभा चुनाव में हलका महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता रहा है। 90 के दशक में जब ताऊ देवीलाल व भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बीच लोकसभा चुनाव में तीन बार मुकाबला हुआ तो रोहतक शहर ने हुड्डा की जीत की हैट्रिक में अहम भूमिका अदा की थी।

पिछले लोकसभा चुनाव में भी भाजपा के डॉ. अरविंद शर्मा की जीत में भी हलके का काफी योगदान रहा। वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर की हार की टीस कांग्रेस को 2014 की टीस की तरह बेचैन कर रही है। ऐसे में कांग्रेस की तरफ से खुद भूपेंद्र सिंह हुड्डा सक्रिय हैं। जबकि भाजपा की ओर से खुद मुख्यमंत्री मैदान में आ गए हैं।

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भाजपा के डॉक्टर मंगलसेन तो कांग्रेस के बतरा बंधुओं की जीत का गवाह रहा है हलका

रोहतक शहर आजादी के बाद से अब तक भाजपा के पितामह कहे जाने वाले डॉक्टर मंगलसेन और कांग्रेस के बतरा बंधुओं की जीत का गवाह रहा है। 1952 से लेकर 2019 तक अब तक केवल बनिया समुदाय से सेठ श्रीकिशन दास को 1985 के उप चुनाव और 1996 के विधानसभा चुनाव को छोड़कर हर बार पंजाबी समुदाय का ही दबदबा रहा है। भाजपा के डॉक्टर मंगलसेन ने 1957 से 1987 तक नौ चुनाव लड़े और सात में जीत हासिल की।

उनके देहांत के बाद कांग्रेस के बतरा बंधुओं का दबदबा रहा। पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के कार्यकाल में जहां सुभाष बतरा विधायक बने, इसके बाद शादीलाल बतरा ने जीत हासिल की। वर्ष 2009 व 2019 में भारत भूषण बतरा विधायक बने। जबकि भाजपा के मनीष ग्रोवर 2014 में तीन हार का सिलसिला तोड़कर विधायक बनने में कायमाब रहे, लेकिन 2019 में बतरा से हार गए। अब भाजपा दोबारा कांग्रेस से यह सीट छीनना चाहती है। इसके लिए मुख्यमंत्री खुद सक्रिय हैं। हालांकि विधानसभा से पहले लोकसभा चुनाव होना है।
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जानें...कौन-कब जीता विधानसभा चुनाव

वर्ष            विजेता             पार्टी

1952 देवराज सेठी             कांग्रेस

1957 डाक्टर मंगलसेन जनसंघ

1962 डाक्टर मंगलसेन जनसंघ

1967 डाक्टर मंगलसेन जनसंघ

1968 डाक्टर मंगलसेन जनसंघ

1972 सेठ किशन दास            कांग्रेस

1977 डाक्टर मंगलसेन            जनसंघ

1982 डाक्टर मंगलसेन भाजपा

1985 (उप चुनाव) सेठ किशन दास कांग्रेस

1987 डाॅक्टर मंगलसेन             भाजपा

1991 सुभाष बतरा             कांग्रेस

1996 सेठ किशन दास हविपा

2000 शादीलाल बतरा कांग्रेस

2005 शादीलाल बतरा कांग्रेस

2009 भारत भूषण बतरा कांग्रेस

2014 मनीष ग्रोवर             भाजपा

2019 भारत भूषण बतरा कांग्रेस
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