रोहतक। दो साल पहले जनस्वास्थ्य विभाग के कच्चा बेरी रोड फाटक के नजदीक वाटर डिस्पोजल पंप में जहरीली गैस से चार सफाई कर्मियों की मौत के मामले में नया मोड़ आ गया है। पुलिस ने अदालत में दाखिल चार्जशीट में जनस्वास्थ्य विभाग के एसई विशाल बंसल, एक्सईएन बिजेंद्र हुड्डा व एसडीओ सुरजीत को क्लीनचिट दी है। केवल जेई संदीप व कर्मचारी नीरज को आरोपी बनाया गया है।
पुलिस की चार्जशीट को मृतक धर्मेंद्र के भाई प्रमेंद्र ने सीआरपीसी की धारा 190 के तहत एएसजे आरके यादव की अदालत में याचिका दायर कर चुनौती दी है। मांग की है कि जनस्वास्थ्य विभाग के एसई, एक्सईएन व एसडीओ को अदालत में बुलाकर केस चलाया जाए। अदालत ने मामले में सुनवाई के लिए 10 नवंबर की तिथि तय की है।
पीड़ित पक्ष के वकील पीयूष गक्खड़ ने बताया कि शौरी कोठी निवासी प्रमेंद्र सिंह ने 26 जून 2019 को शिवाजी कॉलोनी थाने में शिकायत दी थी कि जनस्वास्थ्य विभाग का डिवीजन नंबर 3 के मुख्य डिस्पोजल से नीरज नाम का कर्मचारी आया और उसके भाई धर्मेंद्र (39) को डिस्पोजल पर अपने साथ ले गया। वहां पहले से कैथल निवासी अनिल सैनी (35), पालिका कॉलोनी निवासी रणजीत (28), उत्तर प्रदेश के ऊंचाहार के आकौड़िया निवासी संजय (30) मौजूद था। नीरज ने अपने सीनियर अधिकारी जेई संदीप धनखड़, एक्सईएन विजेंद्र हुड्डा, एसडीओ सुरजीत कुमार और एसई विशाल बंसल से अनुमति लेकर धर्मेंद्र, संजय, रणजीत और अनिल को चैंबर में उतार दिया। चारों ने कहा कि अंदर जहरीली गैस हो सकती है, इसके बावजूद बिना सुरक्षा उपकरणों के अंदर भेजा गया। जैसे ही पंप को खोला तो जहरीली गैस निकली। इस दोरान गैस के प्रभाव से चारों की मौत हो गई।
ये अधिकारी हुए थे नामजद
पुलिस ने मामले में एसई विशाल बंसल, एक्सईएन बिजेंद्र हुड्डा, एसडीओ सुरजीत, जेई संदीप व कर्मचारी नीरज के खिलाफ आईपीसी की धारा 304 व एससी-एसटी एक्ट और पुनर्वास अधिनियम 2013 की धारा 22,7 व 9 के तहत मामला दर्ज किया था। अब अदालत में दाखिल चार्जशीट केवल जेई संदीप धनखड़ व कर्मचारी नीरज के खिलाफ दाखिल की गई है। एसई, एक्सईएन व एसडीओ के खिलाफ चालान पेश नहीं किया गया है।
अदालत में बुलाकर केस चलाया जाए
मामले में बुधवार को प्रमेंद्र ने अपने वकील पीयूष गक्खड़ के माध्यम से अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरके यादव की अदालत में सीआरपीसी की धारा 190 के तहत याचिका दायर की है। दायर याचिका में मांग की गई है कि जेई व कर्मचारी की तरह जनस्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी भी उतने ही दोषी हैं। तीनों को अदालत में बुलाकर केस चलाया जाए।