पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (पीजीआईएमएस) में यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) के नियमों को ताक पर रखा जा रहा है। तकरीबन 50 से अधिक विभागों में विभागाध्यक्षों का लंबे समय से एकाधिकार चला आ रहा है। जबकि नियमानुसार (रोटेशन के हिसाब से) तीन साल में विभागाध्यक्ष का पद अगले वरिष्ठ डॉक्टर को मिलना चाहिए। ऐसी स्थिति में विभागाध्यक्ष से जूनियर आगे नहीं आ पा रहे हैं। अब कई डाक्टर इस मसले पर मुख्यमंत्री से शिकायत करने वाले हैं।
पीजीआईएमएस की अजब-गजब लीलाओं में एक विभागाध्यक्ष (एचओडी) के रोटेशन प्रणाली को लागू नहीं होने देना भी है।
इसका खामियाजा संस्थान को ही भुगतना पड़ रहा है। संस्थान के विभागों में एक व्यक्ति के एकाधिकार के चलते कई वरिष्ठ डॉक्टर संस्थान छोड़कर जा चुके हैं। लेकिन संस्थान रोटेशन नियम को लागू नहीं करवा पा रहा है। यह मामला स्वास्थ्य मंत्री, डीएमईआर तक के पास गया। सूत्रों की मानें तो एक साल पहले स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के निर्देश पर कुलपति डॉ. ओपी कालरा ने एक कमेटी का गठन किया था। इसका चेयरमैन प्रो वाइस चांसलर एवं चर्म रोग विभागाध्यक्ष डॉ. वीके जैन को बनाया गया था। लगभग दो माह पहले हुई शैक्षणिक काउंसिल (एसी) और इससे पहले की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई। इसके लिए दो माह पहले हुई एसी की बैठक में तीन माह का समय निर्धारित किया गया था।
प्रतिमाह कमेटी को अपनी रिपोर्ट सौंपनी थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। यह मामला अभी तक ठंडे बस्ते में पड़ा है। अब संस्थान के कई वरिष्ठ डॉक्टर स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज और मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर तक अपनी बात पहुंचाने की तैयारी में हैं।
बोले अधिकारी
विभागाध्यक्षों के रोटेशन के संबंध में रजिस्ट्रार कार्यालय से मेरे पास पत्र नहीं आया है। कमेटी बनाने की बात हुई है। जैसे ही आदेश मिलेंगे, कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
- डॉ. वीके जैन, पीवीसी, हेल्थ विवि, रोहतक।