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Rohtak News: फीस और किताबों की महंगाई के बाेझ तले दबे अभिभावक

Fri, 05 Apr 2024 10:11 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
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झज्जर। निजी स्कूलों में दाखिले का दौर शुरू हो चुका है। निजी स्कूल संचालक बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए अभिभावकों को तरह-तरह के प्रलोभन भी दे रहे हैं, लेकिन इस बार भी किताबें, कॉपियों के जरिये अभिभावकों की जेब पर बोझ लाद दिया गया है। फीस के साथ बच्चों की कापी किताबों का खर्चा बढ़ा दिया गया है। पिछले साल छठीं से आठवीं कक्षा की किताबों का सेट 3 से 4 हजार रुपये में मिल जाता था, लेकिन इस बार वह 5 से 6 हजार रुपये के बीच हो गया है।
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पहली से बारहवीं तक जो किताबें निजी स्कूलों ने लगवाई थी, अधिकतर ने इस साल उनको बदला दिया है। तर्क दिया जा रहा है कि सिलेबस बदल दिया गया है जबकि हकीकत यह है कि निजी पब्लिशर्स से कमीशन के चक्कर में हर साल सिलेबस बदलने की बात कहकर नई किताबें लगवा दी जाती है। इसके विपरीत एनसीईआरटी की किताबें एक हजार से 1500 रुपये के बीच मिल जाती है जबकि निजी स्कूल संचालक निजी पब्लिसर्श की किताबें लगवा रहे हैं।

अधिकतर निजी स्कूलों में बिक रही किताबें, दुकानदार भी तय
जिले के अधिकतर निजी स्कूल खुद स्कूल के अंदर ही किताबें बेच रहे हैं।सीधे पब्लिसर्श से डील कर किताबें स्कूलों में पहुंचाई गई है। स्कूल संचालक मनमाने रेट लगाकर उनको बेच रहे हैं। नहीं कई निजी स्कूल संचालक ने किताबों के लिए दुकानदार फिक्स किए हुए हैं। उनके अलावा स्कूल की किताबें दूसरे बुक सेलर के पास मिलती ही नहीं। ऐसे में मजबूरन अभिभावकों को मुंह मांगे दामों पर किताबें खरीदनी पड़ रही हैं। इसका मुख्य कारण स्कूल संचालकों का कमीशन तय होना है।
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फीस भी 200 से एक हजार रुपये तक बढ़ाई
निजी स्कूल संचालकों ने इस बार फीस भी अच्छी खासी बढ़ाई है। अभिभावकों की माने तो इस बार फीस 200 रुपये से लेकर एक हजार रुपये तक बढ़ाई गई है। पहली से पांचवीं कक्षा की जो फीस पिछले साल एक हजार से 1500 रुपये के बीच थी, वह इस बार बढ़ाकर 1700 से 2 हजार रुपये कर दी गई है। इसके अलावा छठीं से आठवीं की जो मासिक फीस पिछले साल 2500 से 3 हजार के बीच थी, उसे बढ़ाकर 3400 से 4 हजार तक कर दिया गया है। इसके अलावा नौवीं से बारहवीं की पिछले साल जो मासिक फीस 4 हजार थी, उसे बढ़ाकर 4500-5000 कर दिया गया है। इसके अलावा ट्रांसपोर्ट की मासिक फीस में भी 100 से 200 रुपये तक बढ़ाए गए हैं।

खंड शिक्षा अधिकारियों की है जिम्मेदारी
अधिकारियों की माने तो निजी स्कूल संचालकों की मनमानी को रोकने के लिए हर खंड पर खंड शिक्षा अधिकारी की नियुक्ति होती है। उन द्वारा ही निजी स्कूलों की जांच भी की जाती है। बीईओ को लगता है कि निजी स्कूल ऐसा कर रहे हैं तो वह चेकिंग कर सकते हैं।

जवाबदेह अफसर कर रहे शिकायत का इंतजार
निजी स्कूल संचालक वर्दी से लेकर किताबें, जूते, कॉपियां, स्टेशनरी तक का सामान स्कूलों में मनमाने रेटों पर उपलब्ध करवा रहे हैं। अभिभावक भी इससे परेशान हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों को अभिभावकों की शिकायतों का इंतजार है। उसके बाद ही वह कार्रवाई करेंगे।

जिला शिक्षा अधिकारी राजेश खन्ना से सीधी बातचीत
प्रश्न- निजी स्कूलों में वर्दी, किताबें, कापियां व अन्य सामान बेचा जा रहा है?
उत्तर- इस प्रकार की कोई शिकायत उनके पास नहीं आई है। शिकायत आती है तो कार्रवाई की जाएगी।
प्रश्न- अब तक कोई शिकायत आई है या कोई कार्रवाई गई है?
उत्तर- किसी ने लिखित शिकायत नहीं की है। मिलने पर विभाग कार्रवाई करेगा।
प्रश्न- क्या विभाग सीधे तौर पर निरीक्षण या जांच नहीं कर सकता?
उत्तर- हर ब्लाक में खंड शिक्षा अधिकारी की नियुक्ति है। यदि कहीं गलत हो रहा है तो उनको जांच करने का अधिकार है।
प्रश्न- अभिभावक भी दाखिले के प्रेशर में शिकायत नहीं पाते, वह क्या करें?
उत्तर- यदि कोई निजी स्कूल संचालक अभिभावकों पर किताब, कॉपी या अन्य सामान लेने का दबाव बनाता है तो उसकी शिकायत कर सकते हैं। शिकायत पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
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