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धान और बाजरा घटाना था, बढ़ गया दोनों का रकबा

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Paddy and Bajra had to be reduced, the area of ??both increased
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राज्य सरकार ने पहले धान और बाद में बाजरा का रकबा घटाने को पूरा जोर लगाया। दोनों फसलों की जगह दूसरी फसलें लगाने पर प्रोत्साहन राशि का प्रावधान किया। लेकिन दोनों का ही रकबा पिछले साल की तुलना में बढ़ गया। इससे जिले में सरकार की मेरा पानी, मेरी विरासत योजना को झटका लगा है।
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गिरते भूजल स्तर को देखते हुए राज्य सरकार ने मेरा पानी, मेरी विरासत योजना के तहत किसानों को धान छोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया था। धान की जगह दूसरी फसलें लगाने वाले किसानों के लिए सात हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि का प्रावधान किया गया था। कृषि विभाग को मौजूद खरीफ सीजन में 10 हजार हेक्टेयर धान का रकबा कम करने का लक्ष्य दिया गया था। विभाग ने किसानों को धान की जगह दूसरी फसलें लगाने के लिए प्रोत्साहित करने का अभियान भी चलाया। लेकिन धान का रकबा पिछले साल की तुलना में 2430 हेक्टेयर बढ़ गया। बाजरा की खरीद में पिछले साल हुई गड़बड़ी के कारण इस बार सरकार ने एमएसपी पर बाजरा न खरीदने की घोषणा की थी। किसानों को इतनी राहत दी गई कि बाजरा को भावांतर योजना में शामिल कर दिया गया। अगर सरकार द्वारा निर्धारित रेट से बाजरा के दाम कम हुए तो सरकार भरपाई करेगी। इसके साथ ही कृषि विभाग को निर्देश दिए गए कि किसानों को बाजरा न लगाने के लिए प्रेरित किया जाए। अगर किसान बाजरे को छोड़कर सरकार द्वारा निर्धारित फसलें लगाते हैं तो उन्हें चार हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। लेकिन तमाम कवायद के बाद भी सरकार किसानों का बाजरा से मोह नहीं भंग कर सकी। पिछले साल की तुलना में बाजरा का रकबा इस बार 950 हेक्टेयर बढ़ गया है।
ज्यादा बारिश का अनुमान, धान-बाजरा की तरफ लौटे किसान
कृषि विभाग ने तमाम माथापच्ची करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला है कि कपास की फसल खराब हो गई। वहीं, किसानों को पता था कि इस बार ज्यादा बारिश होनी है, इसलिए वे धान और बाजरा की तरफ लौट गए। यही वजह है कि कपास का रकबा इस बार 2182 हेक्टेयर कम हो गया। ब्लॉक कृषि विकास अधिकारी डॉ. यशपाल दहिया ने कहा कि किसान मौसम की भविष्यवाणी देखते हैं। इस बार ज्यादा बारिश की संभावना थी। रोहतक में लो-लाइंग एरिया सभी ब्लॉकों में ज्यादा है। ऐसे में किसानों ने सोचा कि जलभराव से बाकी फसलें खराब होंगी पर धान बच जाएगा। कपास की बुवाई 15 अप्रैल से 15 मई तक हुई। यहां चिकनी-दोमट मिट्टी है। बुवाई के बाद बारिश हो गई, जिससे फसल खराब हो गई। उन किसानों ने धान और बाजरा की तरफ रुख किया। बाजरा की बुवाई 15 अगस्त तक चलती है। यह सहनशील फसल है, इस पर ज्यादा लागत नहीं आती। कलानौर में रेतीली जमीन और भूजल खारा है, वहां के किसानों ने भी बाजरा लगाया। कपास समेत जो भी फसलें खराब हुईं, उनका रकबा धान और बाजरा की तरफ शिफ्ट हो गया।
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घटने के बजाय साल-दर-साल बढ़ गया रकबा
फसल --- 2020 में रकबा ----2021 में रकबा -- 2021 में लक्ष्य
धान ---- 58900 हेक्टेयर --- 61330 हेक्टेयर -- 50000 हेक्टेयर
बाजरा --- 9910 ---------- 10860 ------- 10860
कपास --- 15536 --------- 13354 -------- 18000
मक्का --- 16 -------------37 ----------- 1000
शुरुआत में कपास की फसल खराब हो गई। मौसम विभाग ने इस साल ज्यादा बारिश की संभावना जताई थी। जिले में सभी पांचों ब्लॉक में काफी लो-लाइंग एरिया हैं। ऐसे में किसानों को लगा कि धान और बाजरा बेहतर विकल्प होंगे।
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- डॉ. इंदर सिंह, उप निदेशक, कृषि विभाग
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