रोहतक। बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा के पूर्व उपाध्यक्ष बलवान सिंह सुहाग ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के अधिवक्ताओं को लेकर दिए गए बयान की निंदा की है। अध्यक्ष को पत्र भेजकर देश में प्रैक्टिस कर रहे 35-40 प्रतिशत अधिवक्ताओं के पास फर्जी विधि डिग्रियां बताने पर विरोध दर्ज कराया है।
उन्होंने कहा कि ऐसे बयान देशभर के लाखों अधिवक्ताओं की गरिमा, प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को आघात पहुंचाता है। उन्होंने प्रश्न उठाया है कि यदि इतनी बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं के पास फर्जी डिग्रियां हैं तो संबंधित व्यक्तियों को ही नहीं बल्कि नामांकन एवं सत्यापन प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार संस्थाओं और अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए।
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उन्होंने कहा कि इससे हाल ही में संपन्न राज्य बार काउंसिल चुनावों की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े होते हैं। ऐसे कथित अपात्र व्यक्तियों के मत चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने बार काउंसिल ऑफ इंडिया से मांग की है कि दावे के समर्थन में आधिकारिक रिकॉर्ड को सार्वजनिक किया जाए।
अधिवक्ता समुदाय से बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए। साथ ही जवाबदेही के साथ पद छोड़ने पर विचार करना चाहिए ताकि बार काउंसिल ऑफ इंडिया संस्था में जनता का विश्वास बना रहे। देश में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नामांकन करने वालों पर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।