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एक अप्रैल से शुरू होगा एनडीसी पोर्टल, ओटीपी से ही होगा टैक्स के रिकॉर्ड में बदलाव

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अब प्रॉपर्टी टैक्स के रिकॉर्ड में आसानी से बदलाव नहीं हो सकेगा। एक अप्रैल से नगर निगम में एनडीसी (नो ड्यूज सर्टिफिकेट) पोर्टल शुरू होगा। सोमवार को चंडीगढ़ मुख्यालय में प्रदेश के निगम आयुक्तों की बैठक में यह निर्णय लिया गया। दावा है कि पोर्टल शुरू होने से टैक्स प्रक्रिया में और पारदर्शिता आएगी।
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वर्ष 2011 के सर्वे के मुताबिक शहर में 1 लाख 70 हजार के करीब प्रॉपर्टी आईडी थी, जो अब बढ़कर 2 लाख के करीब पहुंच चुकी हैं। इसमें 60 प्रतिशत रिहायशी प्रॉपर्टी है, जबकि 30 प्रतिशत वाणिज्यिक व औद्योगिक इकाइयां हैं। 10 प्रतिशत में धार्मिक व सामाजिक संस्थाएं हैं। प्रॉपर्टी टैक्स के रिकॉर्ड में लगातार अपडेट होती रहती हैं। नगर निगम हाउस में पार्षदों ने आरोप लगाया था कि निगम की टैक्स ब्रांच जान बूझकर वाणिज्यिक प्रॉपर्टी को रिहायशी दर बना रही है। इससे निगम को आर्थिक नुकसान हो रहा है। क्योंकि वाणिज्यिक व रिहायशी टैक्स की दर में ज्यादा अंतर है। इसके अलावा प्रॉपर्टी की मिलकियत में भी लगातार बदलाव होता रहता है। किसी तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए मुख्यालय ने एनडीसी पोर्टल शुरू करने का निर्णय लिया है। इसके लिए सोमवार को रोहतक, हिसार, गुरुग्राम, फरीदाबाद, पानीपत, करनाल, अंबाला, पंचकूला व यमुनानगर के आयुक्तों की बैठक चंडीगढ़ में हुई। बैठक में रोहतक से निगम आयुक्त प्रदीप गोदारा ने शिरकत की। एनडीसी पोर्टल के अलावा एनजीटी की गाइड लाइन पर भी मंथन किया गया।
टैक्स रिकॉर्ड में हर अपडेट का ऑर्डर करना होगा अपलोड
एनडीसी पोर्टल शुरू होने पर टैक्स बदलाव की प्रक्रिया में फेरबदल होगा। अब टैक्स ब्रांच के अधिकारी के आदेश पर टैक्स इंस्पेक्टर फील्ड में जाकर रिपोर्ट तैयार करता है। उस रिपोर्ट के आधार पर अपनी रिपोर्ट जोनल टैक्स ऑफिसर को देता है। टैक्स ऑफिसर के हस्ताक्षर के बाद टैक्स रिकॉर्ड में बदलाव हो जाता है। अब एनडीसी पोर्टल शुरू होने के बाद टैक्स में बदलाव का अधिकार नगर निगम आयुक्त के पास होगा। आयुक्त अपनी पावर जोनल टैक्स ऑफिसर या किसी अन्य अधिकारी को दे सकता है। टैक्स ब्रांच के कर्मचारी किसी भी तरह के टैक्स में बदलाव के लिए पोर्टल पर ऑर्डर अपलोड करेंगे। जैसे ही रिकॉर्ड में अपडेट के लिए आवेदन करेंगे तो निगम आयुक्त या उस अधिकारी के मोबाइल पर ओटीपी आएगा, जिसे आयुक्त ने पावर दी हैं। उक्त ओटीपी डालने के बाद ही रिकॉर्ड अपडेट होगा। पोर्टल पर दिनभर जो टैक्स रिकॉर्ड अपडेट हुआ, उसकी रिपोर्ट मुख्यालय चली जाएगी। मुख्यालय के पास अधिकार रहेगा कि वे किसी भी प्रॉपर्टी का रिकॉर्ड देख सकते हैं।
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अब टुकड़ों में लेगा निगम विकास शुल्क, मुख्यालय ने दी हरी झंडी
नगर निगम अब प्रॉपर्टी का टुकड़ों में विकास शुल्क ले सकेगा। अगर संबंधित व्यक्ति ने पहले ही अलग से रजिस्ट्री करवा रखी है। दूसरा, अगर पूर्व में पूरी प्रॉपर्टी आवेदक के नाम रही है तो उससे पूरा विकास शुल्क लिया जाएगा।
मुख्यालय में प्रदेश के सभी नगर निगम के आयुक्तों की सोमवार को बैठक हुई। एक अप्रैल से एनडीसी पोर्टल शुरू किया जा रहा है, इसके तहत ही प्रॉपर्टी टैक्स रिकॉर्ड में बदलाव होगा। इससे टैक्स प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी। साथ ही मुख्यालय की भी सीधी नजर रहेगी।
-प्रदीप गोदारा, आयुक्त, नगर निगम
सरकार सकारात्मक सोच के साथ टैक्स रिकॉर्ड अपडेट प्रक्रिया में बदलाव कर रही है। इससे टैक्स रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की संभावनाएं कम होंगी। साथ ही टैक्स वसूली में भेदभाव भी खत्म होगा।
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-मनमोहन गोयल, मेयर, नगर निगम
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