रोहतक। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) ने शोध क्षेत्र से आगे की ओर कदम बढ़ाया है। इसके लिए विवि ने कंसलटेंसी (परामर्श कार्य), पेटेंट पंजीकरण, पेटेंट कामर्शियलाइज (पेटेंट के व्यवसायीकरण) को बढ़ावा देने पर जोर दिया है। इसके तहत शिक्षकों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से परामर्श शुल्क का 40 से 70 प्रतिशत हिस्सा देने का फैसला लिया गया है। यही नहीं, शिक्षकों की क्षमता वृद्धि के लिए भी प्रयास किए जाएंगे। इस जरूरत को पूरा करने के लिए विशेष केंद्र भी बनाया जाएगा। यहां विशेषज्ञ अपना अनुभव साझा करेंगे। एमडीयू कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने विकास के मुद्दे पर बातचीत करते हुए अपना विजन व भावी योजना की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि कोरोना की तीसरी लहर में भले सब बंद हो चला हो, एमडीयू का कुछ नया करने का जोश व जज्बा बरकरार है। इसी कड़ी में विवि प्रशासन ने शोध से एक कदम आगे बढ़ाते हुए अपने शोध को पेटेंट कराने, पेटेंट के व्यवसायीकरण व परामर्श कार्य को बढ़ावा देने पर जोर दिया है। इसके तहत एमडीयू सरकारी, गैर सरकारी कंपनियों, बोर्ड, निगम, प्रतिष्ठानों को बेहतर उत्पादन व सफल बनने का परामर्श देगा। विवि प्रशासन ने अपने शिक्षकों को परामर्श कार्य के प्रति प्रोत्साहित करने की दिशा में अहम फैसला लिया है। इसके तहत विवि के संसाधनों का प्रयोग किए बगैर परामर्श कार्य करने वाले को 70 प्रतिशत परामर्श शुल्क दिया जाएगा। शेष 30 विवि रखेगा।
यही नहीं, विवि के संसाधनों का प्रयोग करते हुए परामर्श कार्य करने पर शिक्षक को 40 प्रतिशत परामर्श शुल्क दिया जाएगा। जबकि 60 प्रतिशत विवि रखेगा। इसके साथ ही शिक्षकों को परामर्श कार्य की ओर प्रोत्साहित करने के लिए कैंपस में विशेष केंद्र बनाया जाएगा। यहां शिक्षकों की क्षमता वृद्धि के लिए बाहर से विशेषज्ञों को बुलाया जाएगा। इसके अलावा जरूरी वर्कशॉप, ट्रेनिंग भी कराई जाएगी। इससे विवि के साथ शिक्षकों को भी आय प्राप्त करने का अवसर मुहैया होगा।
विवि अब अपने शोध को पेटेंट भी कराएगा। इसे प्रमुखता से लेते हुए शोध के पंजीकरण की कार्रवाई करने के निर्देश सभी विभागाें को जारी कर दिए गए हैं। इससे शोध पर विवि का अधिकार रहेगा। विवि प्रशासन पेटेंट का व्यवसायीकरण भी करेगा। इससे विवि को आर्थिक लाभ होगा। विवि के सभी शोध पेटेंट में दायरे में लाए जाएंगे। इसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। विवि ने पिछले कुछ समय में पेटेंट भी हासिल किया है। जबकि कुछ मामलों में यह प्रक्रिया जारी है। विवि को जल्दी ही कुछ और पेटेंट मिलने की उम्मीद है।
वर्जन
एमडीयू शोध में अग्रणी है। अब इससे एक कदम आगे बढ़ाते हुए शोध को पेटेंट कराने व पेटेंट के व्यवसायीकरण पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही कंसल्टेंसी को भी आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया है। इसके तहत कंसल्टेंसी देने वाले शिक्षकों को कंसल्टेंसी फीस का 40 से 70 प्रतिशत हिस्सा दिया जाएगा।
- प्रो. राजबीर सिंह, कुलपति, एमडीयू।