रोहतक। जिला उपभोक्ता आयोग ने कहा है कि लाइट ड्राइविंग लाइसेंस धारक कैंटर चला सकता है, अगर वजन 7500 किलोग्राम या इससे कम है। ऐसे में बीमा कंपनी यह कहकर क्लेम देने से इन्कार नहीं कर सकती कि चालक के पास वैध लाइसेंस नहीं था। आयोग ने खिड़वाली गांव निवासी जोगेंद्र हुड्डा की याचिका पर बीमा कंपनी को 1.41 लाख रुपये 9 प्रतिशत ब्याज सहित देने का आदेश दिया है।
साथ में, उपभोक्ता को मानसिक उत्पीड़न के चलते पांच हजार रुपये हर्जाना और कानूनी खर्च के तौर पर पांच हजार रुपये फीस देने की भी हिदायत दी है।
आयोग के रिकाॅर्ड के मुताबिक, वाहन मालिक जोगेंद्र हुड्डा ने 2020 में अर्जी दायर की थी कि उसने एजेंट के माध्यम से मई 2018 में एक साल के लिए कैंटर का 5 लाख रुपये तक का बीमा करवाया था। 4 फरवरी 2019 को रेवाड़ी जिले के सदर थाना क्षेत्र में वाहन सड़क हादसे में क्षतिग्रस्त हो गया, जिसे रोहताश चला रहा था।
उसने वाहन की मरम्मत करवाई, जिसका खर्च 3 लाख रुपये आया। साथ ही, उसने अन्य शुल्क भी वहन किए। बीमा एजेंसी को सूचना दी गई। एजेंसी ने कहा कि चालक के पास वाणिज्यिक वाहन चलाने का वैध लाइसेंस नहीं है। वाहन मालिक ने आयोग में अर्जी दायर की कि उसे 3 लाख 18 प्रतिशत ब्याज सहित राशि दिलवाई जाए।
आयोग ने बीमा कंपनी को नोटिस जारी किया। कंपनी ने अपने तर्क को फिर दोहराया। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में निर्णय दिया था कि अगर चालक के पास लाइट लाइसेंस है तो वह वाहन भी चला सकता है।
इस वाहन का वजन 7500 किलोग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए। आयोग ने दोनों पक्षों की बहस के बाद निर्णय दिया कि सर्वेयर ने अपनी रिपोर्ट में 1.41 लाख रुपये के नुकसान का आकलन दिया था। बीमा कंपनी यह राशि ब्याज सहित दे।