जिले में शनिवार को दिन भर हुई जोरदार बारिश कपास और बाजरा की फसलों पर कहर बन कर बरसी है। कृषि विभाग की प्राथमिक रिपोर्ट में इन दोनों फसलों की 50 प्रतिशत से ज्यादा फसल खराब होने की आशंका है। विभाग सोमवार को पूरे जिले में विस्तृत सर्वे करवाएगा, तब नुकसान का सही अंदाजा हो सकेगा।
पिछले दिनों हुई बारिश से अभी तक फसलें उबर नहीं सकी थीं कि शनिवार को फिर जोरदार बारिश हो गई। जल निकासी का प्रबंध न होने के कारण खेतों में जलभराव हो गया। कपास की फसल लगभग पकने की कगार पर थी, उसके खेतों में जलभराव होने से फसल को काफी नुकसान होने की आशंका है। विशेषज्ञों के अनुसार कुछ ही दिनों में कपास की चुगाई शुरू होनी थी। पानी भरने के कारण कपास गलना शुरू हो जाएगी, उसमें बीमारियां लग जाएंगी। जिले में बाजरा की बुआई धान के बाद हुई थी लेकिन इतना पानी यह भी बर्दाश्त नहीं कर सकती। ब्लॉक कृषि विकास अधिकारी यशपाल दहिया ने कहा कि शुरुआती आंकलन के अनुसार धान को ज्यादा नुकसान होने की आशंका नहीं है। लेकिन कुछ जगह तेज हवाओं से धान की फसल बिछ गई है, वहां दाना बिल्कुल खराब हो जाएगा। इसके अलावा धान के खेत में भी अगर पानी सात दिन में न निकला तो फसल गल जाएगी। धूप निकलते ही खेत में भरे पानी का तापमान बढ़ जाएगा, जिससे धान की फसल गल जाएगी। निचले इलाकों की मिट्टी में खारापन ज्यादा होता है, जिसके चलते फसल जल्दी गलती है।
खंडों की फसलों की स्थिति
रोहतक : खंड रोहतक में कंसाला, हुमायूंपुर, मुंगाण, आसन, बखेता, बालंद, शिमली, करौंथा, मायना, भगवतीपुर, बहु जमालपुर, किलोई खास, किलोई दोपाना आदि गांव में बाजरा और कपास की 60 प्रतिशत फसलें खराब होने की आशंका है।
कलानौर : खंड के बनियानी, सुडाणा, सैंपल, गुडाणा, मसूदपुर आदि गांव में कपास और बाजरा की 60-65 प्रतिशत फसल खराब होने की आशंका है।
सांपला : खंड सांपला में सिर्फ भैंसरू कलां व खुर्द, समचाना, हसनगढ़ समेत कुछ गांवों को छोड़कर सभी लो-लाइंग एरिया में पड़ते हैं। उन गांवों में फसलों को काफी नुकसान होने की आशंका है।
महम : महम खंड के भैणी महाराजपुर, निदाना, सामाण, बलंभा आदि गांव लो-लाइंग एरिया में पड़ते हैं। यहां कपास की करीब 70 फीसदी फसल खराब होने की आशंका है।
लाखनमाजरा : इस ब्लॉक में बैंसी में 250 से 300 एकड़, खरेंटी में 200 एकड़, खरक में 100 एकड़ में पानी भर गया। गांव कितौली, सुंदरपुर, चिड़ी आदि में भी यही हाल है। यहां कपास और बाजरा की 60-70 प्रतिशत फसल खराब होने की आशंका है।
शनिवार को हुई बारिश से कपास और बाजरा की फसलों को काफी नुकसान हुआ है। कपास लगभग पक चुकी थी, उसकी चुगाई शुरू होने वाली थी। इस अवस्था पर इतना ज्यादा पानी फसल को बर्बाद कर देगा। धान को शुरुआती तौर पर नुकसान नहीं है। लेकिन अगर कहीं फसल बिछ गई या पानी में डूब गई है तो वह खत्म हो जाएगी। बाकी खेतों में भी अगर पानी जल्द न निकला तो धान को नुकसान होगा।
- डॉ. इंदर सिंह, उप निदेशक, कृषि विभाग