भारत प्रौद्योगिकी नवीनीकरण क्षेत्र में दुनिया के पहले 10 देशों में से एक है। हम उन देशों की अग्रिम पंक्ति में हैं, जिन्होंने क्वांटम तकनीक पर ध्यान दिया। केंद्र सरकार ने इस क्वांटम मिशन के लिए 6000 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक व औद्योगिक अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देना और क्वांटम प्रौद्योगिकी में जीवंत व नवीन पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है। यह कहना है उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का।
वह मंगलवार को महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के 18वें दीक्षांत समारोह में पीएचडी डिग्री धारकों को सम्मानित कर रहे थे। समारोह में 1216 पीएचडी डिग्री धारकों को सम्मानित किया गया। इनमें से 740 महिलाएं शामिल रहीं। उन्होंने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत साल 2030 तक 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन का देश ने लक्ष्य रखा है।
इसके लिए लगभग 19 हजार करोड़ रुपये की मंजूरी दी जा चुकी है। इन क्षेत्रों में आने वाले समय में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। दीक्षांत समारोह में उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों को इस दिशा में सोचना चाहिए।
विफलता से न डरें, विफलता सबसे अच्छी शिक्षक
उपराष्ट्रपति ने कहा कि विद्यार्थी जीवन में जोखिम लेने व विफलता से न डरें। नया करने के लिए सदैव तैयार रहें। विफलता सबसे बड़ा गुरु है। यह सफल होना सिखाती है। स्वामी विवेकानंद के शब्दों को दोहराते हुए कहा कि जीवन में असफल होना बड़ी बात नहीं है बल्कि इसके बाद हार मान लेना बड़ी कमी है।
देश में वृद्धाश्रम की कोई आवश्यकता ही नहीं
उपराष्ट्रपति ने कहा कि आपके जीवन में सफलता तो आएंगी, लेकिन बुजुर्गों, माता-पिता, गुरुजनों व देश का सम्मान प्राथमिकता होनी चाहिए। भारत ऐसा देश है, जहां बुजुर्गों का सम्मान होता है, लेकिन जब कभी कोई यह कहता है कि मैं वृद्धाश्रम बना रहा हूं, तो पीड़ा होती है। क्योंकि हमारे देश में वृद्धाश्रम की कोई आवश्यकता ही नहीं है। भारत को जो विरासत मिली है, वह दुनिया के किसी देश को नहीं मिली है। भारतीयता हमारी पहचान है।
कोहरे ने रोका उपराष्ट्रपति का हेलीकॉप्टर, कार से पहुंचे
समारोह में आ रहे उपराष्ट्रपति का हेलीकॉप्टर मंगलवार सुबह कोहरे ने रोक दिया। इस कारण सुरक्षा एजेंसी को उनके रूट प्लान में बदलाव करना पड़ा। कोहरे के चलते उपराष्ट्रपति कार से रोहतक पहुंचे।