Female surgeon accuses civil surgeon and district hospital medical doctor of harassment
रोहतक। स्वास्थ्य विभाग एक ओर कोरोना महामारी से जंग लड़ रहा है दूसरी ओर जिला अस्पताल में कमरा अलॉटमेंट को लेकर डॉक्टरों में तनातनी हो गई है। मामला कोर्ट में पहुंच गया है और मार्च में दूसरी तारीख पर सुनवाई होनी है। इस मामले में विभाग की सेवानिवृत्त होकर दुबारा सेवाएं दे रहीं महिला सर्जन डॉ. सुषमा जैन ने सिविल सर्जन डॉ. अनिल बिरला और जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रमेशचंद्र आर्य पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है।
जिला अस्पताल ने तैनात महिला सर्जन के सेवानिवृत्त होने के बाद वापस बतौर चिकित्सक ज्वाइनिंग कर ली। इसी दौरान अस्पताल प्रशासन ने महिला सर्जन के कमरे को दूसरे सीनियर डॉक्टर को अलॉट कर दिया। इस पर महिला सर्जन ने अपनी स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला देते हुए कहा कि उनका कमरा उनसे ना लिया जाए। जब उनकी बात नहीं सुनी गई तो उन्होंने इसके लिए कोर्ट में स्टे के लिए गुहार लगा दी। महिला चिकित्सक ने कमरे की मांग करने के साथ विभाग के दो सीनियर डॉक्टरों पर प्रताड़ित करने का भी आरोप लगाया है। इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ. अनिल बिरला ने बताया कि मामला कोर्ट में विचाराधीन है। इस मामले में कोर्ट ही निर्णय करेगी। किसी के सेवानिवृत्त होने के बाद दूसरे को कमरा अलॉट होता है, इसमें प्रताड़ना जैसी कौन सी बात है। वहीं इस मामले में महिला सर्जन डॉ. सुषमा जैन ने बताया कि वह इस मामले में कुछ नहीं कह सकती, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रमेश ही कुछ कह सकते हैं।
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चार सीनियर डॉक्टर सेवानिवृत्ति के बाद कर रहे काम, पांचवीं महिला डॉक्टर ने उठाई समस्या
जिला अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग के निदेशक पद से सेवानिवृत्त हुए डॉ. रमेश धनखड़, सिविल सर्जन के पद से सेवानिवृत्त हुए डॉ. शिव कुमार और एसएमओ के पद से सेवानिवृत्त हुए डॉ. जेपी चौहान व डॉ. आरपी कालोनिया बतौर कंसल्टेंट काम कर रहे हैं। सभी सीनियर डॉक्टरों को प्रशासन ने अलग-अलग कमरे अलॉट किए हैं, जबकि पांचवीं एसएमओ ने कमरा बदलने पर एतराज जताया है।
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चारों डॉक्टर महिला डॉक्टर से सीनियर हैं, लेकिन वह कमरा छोड़ने से मना कर रही हैं। एसएमओ का कमरा वरिष्ठता से आधार पर दूसरे डॉक्टर को अलॉट किया गया है।
-डॉ. रमेशचंद्र आर्य, चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल।