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Rohtak News: पीजीआई समेत प्रदेश के छह जिलों में बहता खून रोकने वाले फैक्टर-8 खत्म

Thu, 29 Jan 2026 03:04 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
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24...राहुल पांचाल, करनाल - फोटो : kishatwar news
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अभिषेक कीरत
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रोहतक। पीजीआई में हीमोफीलिया मरीज रविंद्र को बहता खून रोकने का इंजेक्शन (फैक्टर-8) नहीं मिलने से मौत की वजहों की पड़ताल डरावनी तस्वीर दिखाती है। पीजीआई में तो यह आठ महीने से है ही नहीं, प्रदेश के छह जिलों का भी यही हाल है। यहां घाव होने पर मरीज को ही फैक्टर-8 लाना पड़ेगा।
हरियाणा हीमोफीलिया सोसाइटी के अध्यक्ष विष्णु गोयल के मुताबिक, प्रदेश में हीमोफीलिया के 1000 से अधिक मरीज हैं। इनके इलाज में अक्सर संवेदनहीनता दिखाई जाती है। सरकारी तंत्र की चेतना का आलम यह है कि प्रदेश के इकलौते पीजीआई में ही आठ महीने से फैक्टर-8 इंजेक्शन खत्म हैं।
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विष्णु कहते हैं कि छह जिलों-झज्जर, गुरुग्राम, सोनीपत, यमुनानगर, अंबाला, महेंद्रगढ़ में भी फैक्टर-8 नहीं है। सूबे की स्वाथ्य मंत्री आरती राव महेंद्रगढ़ की ही अटेली विधानसभा सीट से चुनी गई हैं। यहां भी हीमोफीलिया मरीजों का कोई रहबर नहीं है। अधिकांश जिला अस्पताल डिमांड ही नहीं करते।
सोसाइटी अध्यक्ष बताते हैं कि प्रदेश में 2013 से हीमोफीलिया की दवाएं निशुल्क मिलनी चालू हुई थीं। चार-पांच साल तक सब ठीक भी चला। रोहतक से पहले करनाल में भी हीमोफीलिया पीड़ित की मौत हो गई थी। जिला अस्पतालों में भी सिर्फ प्राथमिक इलाज देकर मरीज को पीजीआई भेज देते हैं।
वे सवाल करते हैं कि पीजीआई में फैक्टर उपलब्ध नहीं हैं तो मरीज कहां जाएं, क्या करें। फैक्टर-8 को लेकर बात करने पर पीजीआई प्रशासन बजट की कमी का रोना रोता है। डीएमईआर से मिलने पर भी आश्वासन ही मिले। संवाद
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पीजीआई की जांच से पता चलेगा किसने की लापरवाही
जींद बाईपास निवासी टैक्सी चालक रविंद्र (38) के इलाज में हुई लापरवाही, फैक्टर-8 नहीं होने और रेफर स्लिप नहीं बनाने के आरोपों की पीजीआई निदेशक ने जांच के आदेश दिए हैं। रविंद्र को हाथ-पांव सुन्न हो जाने पर 19 जनवरी को परिजन पीजीआई दिखाने पहुंचे थे। पत्नी सोनिया और भाई नवीन ने सरकारी तंत्र की लापरवाही से जान चली जाने का आरोप लगाया है। कहा, खून की उल्टियां होने के बावजूद न्यूरो के डॉक्टर तीन घंटे बाद देखने आए। उन्हें फैक्टर-8 का इंजेक्शन देना था लेकिन पीजीआई में नहीं मिला। घर से दो इंजेक्शन लाए भी तो डेढ़ घंटे देरी से लगाए गए। बेहद गंभीर स्थिति देख रेफर स्लिप मांगी पर नहीं दी गई। रात 10 बजे निजी एंबुलेंस से दिल्ली स्थित एम्स ले गए। रेफर स्लिप के बगैर एम्स के डॉक्टरों ने देखने से मना कर दिया। सफदरजंग अस्पताल गए। डॉक्टरों ने बताया कि दिमाग में अत्यधिक खून जम जाने से मौत हो गई।
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मेरी जानकारी के अनुसार प्रदेश के सभी जिलों में हीमोफीलिया फैक्टर उपलब्ध हैं। कहीं कमी है तो इसका पता करता हूं।
- डॉ. मनीष बंसल, स्वास्थ्य महानिदेशक, हरियाणा

24...राहुल पांचाल, करनाल- फोटो : kishatwar news

24...राहुल पांचाल, करनाल- फोटो : kishatwar news

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