संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। हीमोफीलिया के फैक्टर-8 के बगैर बच्चों की पढ़ाई भी डिस्टर्ब हो रही है। सूजन बढ़ जाने के कारण वे कई-कई दिन तक स्कूल भी नहीं जा पा रहे हैं। इनके परिजनों की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं कि खुद की जेब से दवाएं खरीदकर ला सकें। यह लोग सरकार से पीजीआई को दवाओं के लिए बजट देने की गुहार लगा रहे हैं। पीजीआई के हीमोफीलिया क्लीनिक के प्रभारी डॉ. सुधीर अत्री कहते हैं, परचेज डिपार्टमेंट को डिमांड भेजी है। जल्द खरीदे जाने की उम्मीद है।
हीमोफीलिया के कारण बेटे को फैक्टर-8 लगता है। न लगे तो कभी घुटने में सूजन तो कभी कंधे में दर्द शुरू हो जाता है। इससे पढ़ाई डिस्टर्ब हो रही है। पीजीआई में आठ महीने से फैक्टर मिल नहीं रहा। डरता हूं, कोई दिक्कत हो गई तो क्या करेंगे।
- श्रवण कुमार, सेक्टर-34, रोहतक
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मेरा भांजा 10 वर्ष का है। सिर से बार-बार ब्लीडिंग होने के कारण उसे फैक्टर-8 देना पड़ता है। एक वर्ष तक यह मिलता रहा पर अब नहीं मिल रहा। इससे जोड़ों, बाजू, घुटनाें में सूजन आने लगी है। सरकार जल्द फैक्टर मुहैया कराए।
- राहुल पांचाल, करनाल
पीजीआई में फैक्टर-8 नहीं लगने से 12 साल के बेटे के शरीर में सूजन हो गई है। रोज बर्फ से सिंकाई करते हैं। वह छह दिन से स्कूल तक नहीं जा पाया है। हीमोफीलिया में तुरंत फैक्टर की जरूरत पड़ती है। सरकार व पीजीआई प्रशासन ध्यान दे।
- इंद्रजीत, अंबाला कैंट
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हीमोफीलिया से ग्रस्त तीन साल के बेटे को जन्म के समय ही ब्रेन हेमरेज हो गया था। एक साल तक पीजीआई में फैक्टर मिला पर जून 2025 से नहीं मिल रहा। हर दिन बच्चे को ब्लीडिंग होती है। कोई दूसरी दवा से राहत नहीं मिलती। कुछ तो करो सरकार।
- हेमा देवी, रोहतक
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हीमोफीलिया के फैक्टर-8 की खरीद के लिए परचेज डिपार्टमेंट को डिमांड भेजी है। खरीद का कार्य उनका है। जल्द ही आने की उम्मीद है।
- डॉ. सुधीर अत्री, प्रभारी, हीमोफीलिया क्लीनिक, पीजीआई
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हीमोफीलिया के फैक्टर न होने का मामला बेहद गंभीर है। इन्हें फैक्टर न मिले तो स्थिति चिंताजनक और जानलेवा भी हो सकती है। हमने अपने कार्यकाल में पीजीआई को सारे फैक्टर उपलब्ध भी कराए थे। स्वास्थ्य विभाग को इसका समाधान निकालना चाहिए।
- डॉ. राहुल चावला, सेवानिवृत्त ज्वाइंट डायरेक्टर, डीएमईआर
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