रोहतक। डैंड्रफ का सफाया करने में औषधीय पौधे कारगर हैं। इनमें से नीम सबसे अधिक प्रभावी है। यह अंग्रेजी दवाओं से ज्यादा असर कारक पाया गया है। यह जानकारी एमडीयू के जेनेटिक विभाग के शोधार्थियों के शोध में सामने आई है। पीएचडी स्कॉलर रतेश मिश्रा व रोजी का यह शोध अंतरराष्ट्रीय जरनल ड्रमैटोलॉजिकल ट्रीटमेंट में प्रकाशित हुआ है। शोधार्थियों के मार्गदर्शक व जेनेटिक विभाग के अध्यक्ष प्रो. जेपी यादव ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में शोध की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि अक्सर सिर में रूसी यानी डैंड्रफ से लोग परेशान दिखाई देते हैं। वे इलाज के लिए सिर में दही, अंडा, मुल्तानी के अलावा शैंपू व अन्य उपचार आजमाते हैं। इसके बावजूद ज्यादातर की समस्या बरकरार रहती है। अब ऐसे लोगों को राहत मिल सकेगी। इसके लिए एमडीयू के शोधार्थियों ने शोध किया है। इसके तहत डैंड्रफ के कारक को समाप्त करने के लिए औषधीय पौधों का असर देखा गया। इनमें सबसे अधिक कारगर नीम रहा। शोध में प्रयोग की गई डैंड्रफ के लिए दी जाने वाली पीप्रासिलीन दवा से औषधीय पौधों के असर की तुलना की गई। इसमें नीम, अनार के छिलके, जामुन, दालचीनी, मुलैठी समेत 25 औषधीय पौधे शामिल हैं।
शोध में नीम की सूखी पत्तियों से प्राप्त किए अर्क को लैब में डैंड्रफ पर डाला गया। इसके परिणाम बेहतर रहे। इसे दवा के मुकाबले 20.31 एमएम दर्ज किया गया। जबकि दवा का बेहतर परिणाम 20.12 एमएम है। इसके बाद अनार के छिलकों का असर 20.12, मुलैठी व दालचीनी का 19.33 व जामुन का 14.23 एमएम दर्ज किया गया।
इन दो तकनीकों का किया प्रयोग
शोध में दो तरह की तकनीक का प्रयोग किया गया। इसमें इथाइल एसिटेट व सुपर क्रिटिकल फ्लूड एक्सट्रैक्टर तकनीक शामिल है। इथाइल एसिटेट में नीम की सूखी पत्तियों का अर्क बनाने के लिए साल्वेंट का प्रयोग किया गया। यह एक रसायन है। इसका दुष्प्रभाव होता है। जबकि सुपर क्रिटिकल फ्लूड एक्सट्रैक्टर में सूखी पत्तियों को पीस कर उसका पाउडर बनाया जाता है। इस पाउडर का डैंड्रफ पर प्रयोग करने पर परिणाम बेहतर मिले। डैंड्रफ के तीन सूक्ष्म जीवी कारक होते हैं। इनमें प्रोपियोनो बैक्टीरियम एकिन, स्टायफालोकोकस एपिडर्मिस व मैलेसिजियाफरफर शामिल हैं। ये सूक्ष्म जीवी डैंड्रफ पैदा करते हैं।
अभी शोध की है और जरूरत
पौधों में फायटो केमिकल यानी पादप रसायन मौजूद होता है। इसमें कई तरह के तत्व या गुण होते हैं। इनमें से किसी एक विशेष तत्व या गुण का किसी पर परिणाम परखने के बाद प्रयोग करना बेहतर है। यही वजह है कि डैंड्रफ पर नीम के अर्क का असर देखे जाने के बाद इस क्षेत्र में और शोध की आवश्यकता सामने आई है। अब नीम के अर्क में मौजूद विभिन्न तत्वों में से डैंड्रफ पर असर कारक तत्व तलाशने की जरूरत है। इससे केवल वही तत्व लेकर और बेहतर व सटीक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
वर्जन:
विवि के विद्यार्थियों ने डैंड्रफ पर शोध किया है। यह पिछले पिछले दिनों जनरल आफ ड्रमैटोलॉजिकल ट्रीटमेंट अंतरराष्ट्रीय जरनल में प्रकाशित हुआ है। शोध में डैंड्रफ के उपचार में नीम के परिणाम बेहतर पाए गए हैं। इस क्षेत्र में और शोध करने की जरूरत है। इससे और बेहतर व कारगर उपचार तलाशा जा सकता है।
- प्रो. जेपी यादव, अध्यक्ष, जेनेटिक विभाग एवं डीन फैकल्टी लाइफ साइंसेज, एमडीयू।