पंडित नेकीराम शर्मा कॉलेज के 44 छात्रों का भविष्य अधर में लटकने से बच गया। कॉलेज ने फीस जमा करा दी, लेकिन यूनिवर्सिटी के पास तक नहीं पहुंची थी। परीक्षा से एक सप्ताह पहले मंगाई गई बैंक स्टेटमेंट में इसका खुलासा हुआ, जिसके बाद आनन-फानन में बैंक की तरफ से यूनिवर्सिटी को सभी 44 छात्रों की फीस भेजी गई। विवि प्रशासन ने इसे स्वीकार कर लिया है।
नेकीराम कॉलेज की तरफ से करीब दो माह पहले सभी छात्रों की फीस स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) में जमा कराई गई थी। इसमें बीए ज्योग्राफी के भी 44 छात्र शमिल थे। फीस जमा कराने के बाद कॉलेज प्रबंधन निश्चिंत हो गया और बैंक ने भी प्रक्रिया पूरी कर ली। यूनिवर्सिटी शेड्यूल के अनुसार, अगले सप्ताह परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। ऐसे में कुछ दिन पहले कॉलेज प्रबंधन ने बैंक से स्टेटमेंट मंगाई, जिसमें खुलासा हुआ कि 44 विद्यार्थियों की फीस यूनिवर्सिटी के पास नहीं पहुंची है। यह खुलासा होने के बाद कॉलेज प्रबंधन ने बैंक से जानकारी मांगी। इस पर बैंक अधिकारी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। मामले में कई दिनों से जद्दोजहद चल रही थी। सवाल उठ रहा था कि 44 छात्र परीक्षा दे पाएंगे या नहीं। यूनिवर्सिटी की तरफ से स्पष्ट कर दिया गया था कि जिन छात्रों की फीस जमा नहीं हुई वह परीक्षा नहीं दे सकते। लंबी जद्दोजहद के बाद सोमवार को मामले का समाधान हो गया। कॉलेज प्रबंधन के कहने पर यूनिवर्सिटी बिना जुर्माने के फीस जमा करने को तैयार हो गई, जिसके बाद बैंक की तरफ से यूनिवर्सिटी को दोबारा से फीस भेजी गई।
यह उठ रहे सवाल
मामले का खुलासा होने के बाद कई सवाल उठ रहे हैं। पहला सवाल यह है कि बैंक की तरफ से इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई? दूसरा सवाल यह है कि जब यूनिवर्सिटी के पास फीस नहीं पहुंची तो उन्होंने कॉलेज से संपर्क क्यों नहीं किया। तीसरा बड़ा सवाल यह है कि कॉलेज प्रबंधन ने बैंक में फीस जमा कराने के बाद कंफर्म करना मुनासिब क्यों नहीं समझा। हालांकि अब सभी इन सवालों से बच रहे हैं, लेकिन गनीमत है कि छात्रों का भविष्य बच गया।
मामला जानकारी में आने पर बैंक की तरफ से यूनिवर्सिटी को फीस भेज दी गई है। यूनिवर्सिटी ने भी बिना जुर्माने के उसे स्वीकार कर लिया है। मामले में बैंक की लापरवाही सामने आई है। वहीं, यूनिवर्सिटी ने भी फीस जमा नहीं होने की कोई सूचना नहीं दी।
- डॉ. वेदप्रकाश श्योराण, प्राचार्य पंडित नेकीराम शर्मा कॉलेज