रोहतक। गांव खरखड़ा के पूर्व सैनिक सुनील कुमार ने यह साबित किया है कि सफलता के लिए उम्र बाधा नहीं होती। सेना से सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने मत्स्य पालन को अपनाकर इसे अपने सफल उद्यम के रूप में स्थापित किया। अब वे प्रतिवर्ष करीब आठ मीट्रिक टन मछली उत्पादन कर सालाना चार लाख लाभ कमा रहे हैं।
45 वर्षीय सुनील कुमार केवल दसवीं पास हैं। वर्ष 2017 में भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद उन्होंने सेवानिवृत्ति निधि का उपयोग कर स्वयं का व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया और मत्स्य पालन को चुना।
सुनील ने मत्स्य पालन विभाग से तकनीकी जानकारी प्राप्त की तथा एआरटीआई हिसार से विशेष प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें तालाब प्रबंधन, मत्स्य बीज संचयन, पोषण प्रबंधन और आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों की जानकारी दी गई।
वर्ष 2020 में उन्होंने गांव खरखड़ा में अपने दो एकड़ के तालाब में मत्स्य पालन शुरू किया। इसमें 10 से 12 हजार भारतीय प्रमुख कार्प (आईएमसी) मत्स्य बीज का संचयन किया गया। विभागीय मार्गदर्शन और वैज्ञानिक पद्धति अपनाने से आज वे प्रतिवर्ष लगभग आठ मीट्रिक टन मछली उत्पादन कर रहे हैं।