एनएसएस शिविर में स्वयंसेवकों के साथ मुख्यअतिथि।
झज्जर। शिक्षा विभाग द्वारा हर साल सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों को वर्दी भत्ता दिया जाता है, लेकिन जिले के लगभग 25 प्रतिशत बच्चे अब भी वर्दी से वंचित हैं। इन विद्यार्थियों के खाते आधार लिंक न होने और बैंकों में खाते न होने के कारण इनको वर्दी भत्ते का लाभ नहीं मिल सका है। ऐसे में अभिभावक अपनी जेब से ही पैसा लगाकर वर्दी खरीदकर बच्चों को स्कूल में भेज रहे हैं।
जिले के सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं तक लगभग 34 हजार बच्चे पिछले साल शिक्षा ग्रहण कर रहे थे। इसमें से लगभग 8 हजार से ज्यादा बच्चों के बैंक खाते आधार लिंक न होने और खाता न होने के कारण उनके खातों में वर्दी का भत्ता न हीं आ सका। इसके चलते अभिभावकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि विभाग की तरफ से बार-बार पत्र जारी कर बैंक खातों को आधार लिंक व खाते खुलवाने बारे निर्देश भी दिए गए, लेकिन कोई कार्रवाई अभिभावकों की तरफ से नहीं की गई।
सीधे खातों में डाली जाती है राशि
शिक्षा विभाग द्वारा वर्दी भत्ता सहित अन्य राशि अब स्कूली बच्चों के अभिभावकों के खातों में डाली जाती है। स्कूल द्वारा बच्चे का बैंक में खाता माता-पिता के साथ खुलवाया जाता है। उसी खाते में ही पिछले दो साल से विभाग द्वारा वर्दी भत्ता डाला जाता है। जिन बच्चों के खाते, आधार नंबर व अन्य जानकारी सत्यापित हो जाती है। फिलहाल उनके खातों में ही राशि डाली गई है। बाकी अभी पेंडिंग हैं।
किस कक्षा में कितने बच्चे
पहली 3269
दूसरी 3161
तीसरी 4445
चौथी 4883
पांचवीं 5002
छठीं 4900
सातवीं 4790
आठवीं 5467
वर्जन
विभाग द्वारा अब विद्यार्थियों के बैंक खाते, आधार सत्यापित होने पर वर्दी भत्ता राशि सीधे खातों में डाल दी जाती है। इसकी जिला स्तर पर अब सूचना विभाग ही जारी करता है। प्राइमरी के लिए 800 और अपर प्राइमरी के लिए एक हजार रुपये की राशि बच्चों के खातों में डाली जाती है।
- सुभाष भारद्वाज, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, झज्जर