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स्वर्ग में बैठे वोटर गिरा रहे वोटिंग प्रतिशत

Tue, 19 Jan 2016 12:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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क्या कोई स्वर्ग में बैठकर धरती पर किसी आंकड़े में बदलाव कर सकता है? यह बात थोड़ी अजीब जरूर लगती है लेकिन पंचायत चुनाव में ऐसा ही हुआ है। स्वर्ग में बैठे वोटर पंचायत चुनाव का वोटिंग प्रतिशत गिरा रहे हैं। क्योंकि चुनाव में जनवरी 2015 में पुनरीक्षित की गई वोटर लिस्ट को आधार बनाया गया है।
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 इसमें नए वोटरों के नाम जोड़ दिए गए हैं, लेकिन मरने वालों के नाम नहीं काटे गए। प्रदेश में ऐसे लगभग 8628 वोटर हैं। उनके नाम लिस्ट से कटने पर हर जिले का वोटिंग प्रतिशत बढ़ सकता था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

प्रदेश में वर्ष 2014 में हुए विधानसभा चुनाव की वोटर लिस्ट को जनवरी 2015 में अपडेट किया गया। पंचायत चुनाव इसी लिस्ट को आधार बनाकर कराए जा रहे हैं। इस एक साल के दौरान लिस्ट को कई बार पुनरीक्षित जरूर किया गया, लेकिन एक बड़ी खामी रह गई।
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इसमें नए वोटरों के नाम तो जुड़ गए लेकिन मरने वालों के नाम नहीं काटे गए। यही कारण है कि अधिकतर गांवों की वोटर लिस्ट में मरने वालों के नाम भी प्रकाशित हो गए। प्रदेश के सभी जिलों की वोटर लिस्ट का यही हाल है। इस एक साल में मरने वालों का विभागों में दर्ज आंकड़ा देखे तो वह 8628 है। इनमें सबसे ज्यादा हिसार में 636 हैं तो अंबाला में ऐसे 622 लोग हैं।

ऐसे सबसे कम लोग पंचकूला में 206 हैं और झज्जर में 215। हालांकि इससे आम आदमी को कोई नुकसान नहीं है, लेकिन इन मरने वाले लोगों के नाम वोटर लिस्ट से कट जाते तो वोटिंग प्रतिशत में काफी बढ़ोतरी हो सकती थी। ऐसा मतदाता पुनरीक्षण में लगाए गए कर्मियों के कारण नहीं हो सका तो अधिकारियों ने भी इस पर ध्यान नहीं दिया। अब जल्द ही वोटर लिस्ट के पुनरीक्षण की बात जरूर कही जा रही है।
जिले                 मृतक
अंबाला              622
भिवानी              568
फतेहाबाद           418
फरीदाबाद           465
गुड़गांव             386
हिसार              636
झज्जर              215
जींद                311
कैथल             365
करनाल            278
कुरुक्षेत्र           362
महेंद्रगढ़           475
मेवात             567
पलवल            378
पंचकूला           206
पानीपत            401
रेवाड़ी             310
रोहतक            518
सिरसा             367
सोनीपत           318
यमुनानगर         462


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विधानसभा की वोटर लिस्ट को जनवरी 2015 में पुनरीक्षित किया गया था, उसके पुनरीक्षण की जिम्मेदारी बीएलओ को सौंपी जाती है। लिस्ट से मरने वालों के नाम नहीं कटे हैं और उससे वोटिंग प्रतिशत पर फर्क जरूर पड़ता है। वोटर लिस्ट का समय-समय पर पुनरीक्षण होता रहता है और अब फिर से किया जाएगा।
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अमित खत्री, एडीसी।
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