आस्था और विश्वास के प्रतीक बाबा मस्तनाथ मठ, अस्थल बोहर में चल रहे तीन दिवसीय मेले के पहले दिन शनिवार को बाबा मस्तनाथ की समाधि पर अलसुबह से ही हजारों श्रद्धालुओं की कतारें लगनी शुरू हो गईं। वही साथ लगते स्कूल के खेल मैदान में श्रद्धालुओ ने मोटर पैराग्लाइडिंग का भी खूब लुफ्त उठाया।
बाबा मस्तनाथ के इस मेले में सभी भक्तगण अपनी-अपनी मन्नतें मांगने के साथ साथ समाधि स्थल के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त के लिए यहां आते हैं। बाबा मस्तनाथ मठ परिसर लाखों रंगबिरंगी लाइटों से जगमगा उठा है। ऐसा प्रतीत होता है जैसे दीपावली का पर्व आ गया हो। हजारों लोग इस अद्भुत नजारे को अपने मोबाइल फोन के कैमरे से सेल्फी के माध्यम से कवर करने में लगे हुए हैं।
मठ के महंत योगी बाबा बालक नाथ मठ की परंपरा के अनुसार गद्दी पर विराजमान हुए और भक्तों को आशीर्वाद दिया। मान्यता है कि गद्दी पर विराजमान महंत में भक्तों को बाबा मस्तनाथ के दर्शन होते हैं और मांगी गई मन्नत पूरी होती हैं, महंत के दर्शन के लिए दिनभर भक्तों का तांता लगा रहा।
ढोल नगाड़ों की थाप पर थिरकते नजर आए श्रद्धालु
मेले के भक्ति रंग में सराबोर अनेक नवयुवक युवतियां ढोल नगाड़ों की थाप पर थिरकते नजर आए। सुबह 4 बजे से ही मठ में धूणे और समाधि पर पूजा का क्रम शुरू हो गया था। श्रद्धालुओं ने कहीं पर देसी घी की जोत लगाई तो कहीं पर गुड और कंबल चढ़ाते हुए मन्नतें मांगी। मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद की व्यवस्था सुबह शुरू हुई भंडारा रात 12 बजे के बाद तक जारी रहा। आज प्रसाद रूप में लड्डू , बालूशाही, चावल, सब्जी, मलीदा, मूंग की दाल रोटी और पूड़ी की व्यवस्था थी।
दिन में लोगों ने मेले में खरीदारी की और झूलों का आनंद लिया। इसके अलावा देश विदेश से आए भक्तों के लिए मंदिर निर्माण में उपयोग हो रही शिल्प कला भी खास चर्चाओं में है। मंदिर साज-सज्जा में उपयोग किए गए पुष्प भी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। सबसे अधिक सांप कला के माहिर कलाकार अद्भुत रंगों के माध्यम से भक्तों के अस्थाई टैटू बनाए गए।