प्रदेश की राजधानी चंडीगढ़ में 14 साल प्रोफेसर बनकर विद्यार्थियों को पढ़ाने वाले एचसीएस इंद्रजीत सिंह अब जिला पार्षदों को विकास का पाठ पढ़ाएंगे। एक दिन पहले इंद्रजीत ने जिला परिषद के सीईओ के तौर पर कार्यभार संभाला है। रोहतक के साथ-साथ उनके पास सोनीपत का भी अतिरिक्त कार्यभार रहेगा। कार्यभार संभालने के बाद सीईओ इंद्रजीत ने अमर उजाला से विशेष बातचीत की।
जिप सीईओ बने इंद्रजीत ने बताया कि 2001 में वे चंडीगढ़ स्थित सेक्टर-11 के गवर्नमेंट कालेज में हिस्ट्री असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर ज्वाइन किया। 2004 में उनका चयन एचसीएच के तौर पर हो गया। बाद में सूची अदालत केस के चलते अटक गई। कांग्रेस राज में सूची पर कोई फैसला नहीं हो सका। अब भाजपा सरकार ने अदालत के निर्णय के बाद चयनित एचसीएस को ज्वाइन करवाया। बचपन से ही उनके मन में सीधा पब्लिक से जुड़कर जनहित के कार्य करने की इच्छा रही थी। असिस्टेंट प्रोफेसर की एक अच्छी नौकरी थी, लेकिन संतुष्टि नहीं मिल पाती है। ऐसे में उसने एचसीएस के तौर पर नौकरी ज्वाइन कर ली। अब ट्रेनिंग के बाद उनकी पोस्टिंग सीईओ जिला परिषद के तौर पर हुई है। बता दें कि पहली बार भाजपा सरकार ने जिला परिषद के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र का विकास करवाने के लिए सीईओ का पद तय किया है। इससे पहले यह कार्य एडीसी को अतिरिक्त तौर पर करना होता था। व्यस्तता के कारण एडीसी जिला परिषद की तरफ पूरा ध्यान नहीं दे पा रहे थे। अब सीईओ के आने से जिला परिषद के विकास को नई गति मिलेगी।
30 मार्च को बुलाई मीटिंग
सीईओ इंद्रजीत ने बताया कि 30 मार्च को जिला पार्षदों की मीटिंग जिला परिषद कार्यकाल में होगी। मीटिंग के एजेंडे के लिए जिप प्रधान बलराज कुंडू से बातचीत की जाएगी। उनका प्रयास रहेगा कि जिला परिषद के माध्यम से गांवों में ज्यादा से ज्यादा विकास कार्य करवाए जाएं। साथ ही, सामाजिक संस्थाओं को साथ लेकर ग्रामीण परिवेश में बदलाव लाने का प्रयास करेंगे। सबसे पहले गांव-गांव ब्लड कैंप लगाने का प्रयास करेंगे।