हरियाणा के रोहतक में चुनावी माहौल के बीच पुलिस एक बार फिर सवालों के घेरे में है। तेज कॉलोनी से एक दिन पहले लापता 42 वर्षीय विजय उर्फ काला ने आत्महत्या कर ली। बुधवार को उसका शव आईजी कार्यालय के सामने दिल्ली बाईपास पर होटल के कमरे में मिला।
मरने से पहले विजय ने पत्नी और बच्चों को तड़के तीन बजे व्हाट्सएप पर दो पेज का सुसाइड नोट भेजा, जिसमें एक पुलिसकर्मी सहित पांच लोगों को आत्महत्या के लिए जिम्मेदार ठहराया है।
पुलिस के मुताबिक, तेज कॉलोनी निवासी जयप्रकाश ने शिकायत दी है कि उनका भाई विजय उर्फ काला मंगलवार को करीब 11 बजे घर पर यह कहकर गया था कि वह किसी काम से दिल्ली जा रहा है, लेकिन लौटा नहीं। पुरानी सब्जी मंडी थाना पुलिस ने गुमशुदगी का मामला दर्ज कर उसे तलाश किया।
आईजी कार्यालय के सामने स्थित होटल के कर्मचारियों ने पुलिस को सूचना दी कि मंगलवार को तेज कॉलोनी का युवक विजय होटल में ठहरा था, लेकिन 11 बजे तक भी दरवाजा नहीं खोला। पुलिस मौके पर पहुंची। परिजनों को भी इस मामले की सूचना मिल गई। परिजनों की मौजदूगी में दरवाजा तोड़ा गया। विजय का शव बाथरूम के अंदर छोटे पंखे से बंधी रस्सी से लटका मिला। पैर फर्श पर लगे हुए थे।
लिखा- पुलिसकर्मी ने 10 हजार रुपये मंथली मांगी, कहा- हर तीन माह में चाहिए 30 हजार रुपये
विजय ने कथित सुसाइड नोट में लिखा कि वह मजदूरी के बाद घर लौट रहा था। गोहाना अड्डे पर पुलिसकर्मी रामधारी मिला। बोला- तुम सट्टा खाईवाली करते हो। बाइक पर बैठ जा, नहीं तो चरस या पिस्तौल का केस बनाकर 10 साल के लिए अंदर करवा दूंगा। उसे गौकर्ण पार्क में ले गया, जहां हर तीसरे माह 30 हजार रुपये मांगे। उसने कई किस्तों में चार लाख रुपये ले लिए। वह फोन का इस्तेमाल नहीं करता। तीन माह बाद रुपये लेने की जगह बदल लेता है। इस काम में सोनू, सुरेश, जग्गे व सरदार उर्फ जुडी का भी हाथ बताया गया था। इतना ही नहीं, उसके भाई सुरेंद्र की दुकान पर 180 ग्राम चरस भी रखवाई गई थी। इसमें अन्य पुलिसकर्मियों की भी मिलीभगत थी। रामधारी ने केस खत्म करवाने के बदले 20 हजार रुपये भी वसूले थे। फिर भी चालान काट दिया। पुलिसकर्मी की वजह से सरेआम कोरेक्स, चरस व अवैध शराब का धंधा किया जा रहा है।
छोटे बच्चों को लगा दी चरस की लत, समाज नशामुक्त होना चाहिए
विजय ने कथित सुसाइड नोट में लिखा कि छोटे-छोटे बच्चों को चरस की लत लगाई गई है। उन्होंने सारे समाज का माहौल खराब कर रखा है। डर के कारण मोहल्ले वाले इनकी शिकायत नहीं करते। उनके भाई सुरेंद्र के केस को दोबारा ओपन किया जाए। आरोपियों को कड़ी सजा दी जाए, ताकि किसी निर्दोष को दोबारा जेल न जाना पड़े। आरोपी रामधारी, सोनू, जग्गा, सुरेश व सरदार उर्फ जूडी ने उसे आत्महत्या के लिए मजबूर किया है। अदालत इनको कड़ी सजा दे। झगड़े के दौरान सोनू ने कहा था कि उनके भाई की दुकान पर चरस हमने रखी थी। हमने तुम्हारे भाई को उठवाया था, हमारा क्या कर लोगे। आरोपियों ने 4 लाख रुपये रामधारी से वसूल करवाए। इससे उसके परिवार की आर्थिक हालत खराब हो गई है। मुझे आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ा। सुसाइड नोट में हस्ताक्षर के बाद नीचे दो लाइन में बड़े शब्दों में लिखा है कि मेरा समाज मुझे नशामुक्त चाहिए, मैं मर गया तो क्या हुआ, समाज का तो भला होगा। धानक समाज जिंदाबाद, थैंक्यू।
मेरा भाई विजय विज्ञापन के फ्लैक्स व बोर्ड दिहाड़ी पर लगाने का काम करता था, लेकिन उसे आत्महत्या के लिए मजबूर कर दिया गया। आईजी कार्यालय के बाहर 45 मिनट शव रखकर प्रदर्शन किया, लेकिन बताया गया कि आईजी अपने कार्यालय में नहीं हैं। इसके बाद पुलिस ने शव डेड हाउस में रखवा दिया।
- जयप्रकाश, विजय का भाई
दो पेज का सुसाइड नोट मिला है, जिसके आधार पर आरोपी पुलिसकर्मी व अन्य के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने का केस दर्ज किया गया है। पुलिसकर्मी रामधारी रिटायर हो चुका है, ऐसा पता चला है। जल्द पूछताछ की जाएगी।
- इंस्पेक्टर सुनील कुमार, थाना प्रभारी, पुरानी सब्जी मंडी