जिले के दो न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट में इस्तगासा दायर की गई है। वकील प्रदीप मलिक ने अवैध हिरासत में रखे गए आरोपी भगवतीपुर गांव निवासी रविंद्र की तरफ से एसीजेएम अश्वनी कुमार मेहता की कोर्ट में इस्तगासा दायर किया है। इस्तागासे को कोर्ट की केस इंफोर्मेंशन सिस्टम ब्रांच में भेजा गया है। यह 25 मार्च को संबंधित कोर्ट में पहुंचेगा।
आरोपी के वकील प्रदीप मलिक ने बताया कि पुलिस ने 22 फरवरी को मेडिकल मोड़ से वरुण, मोहित, मोहित कुमार और रविंद्र सहित 8 युवकों को धारा 144 का उलघ्घंन करने पर गिरफ्तार किया था। इनमें से एक आरोपी सोनीपत के गौरड़ गांव निवासी वरुण के पास से पुलिस को तलवार मिली थी।
पुलिस ने आरोपियों पर आईपीसी की धारा 188 ‘सरकारी अधिकारी के आदेश की अवहेलना करना’ 148, 149 ‘एक ही आरोप में पांच या पांच से ज्यादा आरोपियों को पकड़ना, और आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया था। वकील प्रदीप मलिक का कहना है कि उन्होंने कोर्ट में मामले में पकड़े गए आरोपी रविंद्र की जमानत याचिका लगाई थी। लेकिन कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया। जबकि उसके खिलाफ लगी सभी धाराएं जमानती हैं। आरोपी जमानती देने को भी तैयार था। इसके बाद दूसरी कोर्ट में जमानत याचिका लगाई गई।
यहां भी जमानत को खारिज कर दिया गया। वकील का कहना है कि जमानती धारा लगे होने और आरोपी द्वारा जमानती देने के बावजूद कोर्ट ने उसे अवैध हिरासत में भेज दिया। इस कारण उन्होंने दोनों न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 344 ‘किसी भी आदमी को 10 या 10 दिन से ज्यादा अवैध हिरासत में रखना’ 166 ‘कोई भी सरकारी अधिकारी कानून का उलंघ्घन करके किसी को नुकसान पहुंचाए’ के तहत रविंद्र की तरफ से इस्तगासा
दायर किया है।
प्रदीप मलिक का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति धारा 144 की अवहेलना करता है तो संबंधित व्यक्ति को गिर तार करने के लिए डीसी या उससे उच्च अधिकारी की लिखित शिकायत आरोपी के खिलाफ जरु री है। यह सब सीआरपीसी की धारा 195 में स्पष्ट लिखा हुआ है।
होईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भेजी कॉपी
शिकायत की कॉपी और उसके साथ एक एप्लीकेशन पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भेजी है। एप्लीकेशन में मांग की गई है कि दोनों जजों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दें। यह एप्लीकेशन किसी भी सरकारी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले उसकी नियुक्ति अथारिटी को भेजनी जरूरी होती
है।