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Cancer Treatment: व्हेल के संकेतों को पढ़कर वैज्ञानिक खोजेंगे पक्का इलाज, जींस में मिली प्रतिरोधक क्षमता

Fri, 23 Jun 2023 04:33 PM IST
नवीन दलाल योगेश नारायण दीक्षित, रोहतक (हरियाणा)

सार

दुनिया को कैंसर के चंगुल से बाहर निकालने के लिए एक उम्मीद की किरण जगी है। इसी उम्मीद से दुनिया की कई नामी यूनिवर्सिटी, वैज्ञानिक शोध संस्थान और दानदाता एक मंच पर आए है। जो व्हेल के जींस में कैंसर की कोशिकाओं से लड़ने इलाज खोजेंगे।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कैंसर की बीमारी जिस तरह से महामारी का रूप लेती जा रही है, उससे इसके स्थायी इलाज की चिंता पूरी दुनिया को हो रही है। इसी चिंता ने दुनिया की कई नामी यूनिवर्सिटी, वैज्ञानिक शोध संस्थानों और दानदाताओं को एक मंच पर खड़ा कर दिया है। बीमारी के कारण, विभिन्न जीवों में प्रतिरोधक क्षमता और स्थायी इलाज की तलाश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) ने इस साझा मंच को उम्मीद की एक किरण दिखा दी है। उसी पर चलते हुए उनका शोध अब व्हेल मछली के व्यवहार को समझने और उसके संकेतों को पढ़ने पर केंद्रित हो गया है।

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स्तनधारी व्हेल पर शोध का परिणाम मनुष्य में इलाज का रास्ता दिखाएगा  
बहुत बड़े उद्देश्य के साथ शुरू हुए इस शोध की न समय सीमा तय की गई है और न खर्च की जाने वाली राशि। केवल तय किया गया है दुनिया को कैंसर के चंगुल से बाहर निकालने का जल्द रास्ता खोजना है। इसीलिए इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में जंतु विज्ञानी, कोशिका विज्ञानी से लेकर रसायन और भौतिक विज्ञानी के साथ एआई विशेषज्ञ तक जुड़े हैं। इस शोध के पीछे दुनिया की दिग्गज आईटी और दूसरी कंपनियों के ट्रस्ट और फाउंडेशन की ताकत खड़ी है।

पहला कदम मछलियों की भाषा समझना
प्रोजेक्ट के प्रारंभिक काम से जुड़े गैर लाभकारी संस्थान के शोध विज्ञानी ने अमर उजाला को बताया कि अमेरिका की नामी हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर व्हेल की भाषा को समझने के लिए विशेष सेंसर तैयार कर लिए गए हैं। इन सेंसर को अलग-अलग समुद्री क्षेत्र में रहने वाली मछलियों में लगाने का काम चल रहा है। यह सेंसर मछलियों की आपस में बातचीत या संकेतों को जमा करेंगे।
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सेंसर के डाटा के विश्लेषण के लिए भी तैयारी कर ली गई
इसके बाद इन संकेतों को अंग्रेजी भाषा में परिवर्तित करने अथवा समझने के लिए डाटा सेंटर पर भेजा जा रहा है। जीवाणु, विषाणु या अन्य बीमारी पैदा करने वाले कीटाणु के शरीर में प्रवेश करने पर व्हेल का दिमाग किस अंग को संदेश देता है यह सेंसर नोट करेगा। किस तरह की कोशिकाएं कैंसर कारक कोशिकाओं को खत्म करती हैं और सेहत पर फर्क नहीं पड़ने देतीं, यह भी सेंसर पता करेंगे। सेंसर के डाटा के विश्लेषण के लिए भी तैयारी कर ली गई है।

व्हेल से ही शोध की शुरुआत क्यों

हार्वर्ड विश्वविद्यालय के साथ जुड़कर काम कर रही एक शोध टीम (सीईटीआई) अति संवेदनशील सेंसर बनाकर उन्हें अलग-अलग देशों में जाकर व्हेल के शरीर के अंदर लगा रही है। इन सेंसर के विकास से जुड़े हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के साथ काम कर रहे एप्लाइड साइंटिस्ट और उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के मूल निवासी वैज्ञानिक मुनीर खान ने बताया कि व्हेल स्तनधारी होने और उसके दिमाग के बड़े के होने कारण इसे रिसर्च में शामिल किया गया है। व्हेल के जींस में कैंसर की कोशिकाओं से लड़ने और उन्हें खत्म करने की क्षमता का पता चला है। व्हेल की आयु 100 साल तक हो सकती है। इससे एक ही मछली में लगाया सेंसर लंबे समय तक जानकारी देता रहेगा और उनमें उन्नत सेंसर आगे लगाए जा सकेंगे।
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व्हेल में कैंसर से लड़ने की क्षमता वाले जींस

कई शोध में यह बात सामने आ चुकी है कि व्हेल में कैंसर से लड़ने की क्षमता वाले जींस होते हैं। साथ ही लंबी उम्र के बावजूद उनमें अल्जाइमर जैसे लक्षण विकसित नहीं होते। इसलिए वैज्ञानिक जानना चाह रहे हैं कि कैंसर कोशिकाओं के शरीर में प्रवेश करने पर व्हेल के दिमाग का कौन सा अंग सक्रिय होता है। यह भी जानने की कोशिश है कि दिमाग का संदेश किस अंग को जाता है और कौन से जींस कैंसर कोशिकाओं को खत्म करते हैं। यह सब जानने के लिए हमारी टीम की ओर से सेंसर तैयार कर लिए गए हैं। इन्हें अलग-अलग देशों के समुद्र तट पर व्हेल मछलियों में लगाया जा रहा है।
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