हार्वर्ड विश्वविद्यालय के साथ जुड़कर काम कर रही एक शोध टीम (सीईटीआई) अति संवेदनशील सेंसर बनाकर उन्हें अलग-अलग देशों में जाकर व्हेल के शरीर के अंदर लगा रही है। इन सेंसर के विकास से जुड़े हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के साथ काम कर रहे एप्लाइड साइंटिस्ट और उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के मूल निवासी वैज्ञानिक मुनीर खान ने बताया कि व्हेल स्तनधारी होने और उसके दिमाग के बड़े के होने कारण इसे रिसर्च में शामिल किया गया है। व्हेल के जींस में कैंसर की कोशिकाओं से लड़ने और उन्हें खत्म करने की क्षमता का पता चला है। व्हेल की आयु 100 साल तक हो सकती है। इससे एक ही मछली में लगाया सेंसर लंबे समय तक जानकारी देता रहेगा और उनमें उन्नत सेंसर आगे लगाए जा सकेंगे।
कई शोध में यह बात सामने आ चुकी है कि व्हेल में कैंसर से लड़ने की क्षमता वाले जींस होते हैं। साथ ही लंबी उम्र के बावजूद उनमें अल्जाइमर जैसे लक्षण विकसित नहीं होते। इसलिए वैज्ञानिक जानना चाह रहे हैं कि कैंसर कोशिकाओं के शरीर में प्रवेश करने पर व्हेल के दिमाग का कौन सा अंग सक्रिय होता है। यह भी जानने की कोशिश है कि दिमाग का संदेश किस अंग को जाता है और कौन से जींस कैंसर कोशिकाओं को खत्म करते हैं। यह सब जानने के लिए हमारी टीम की ओर से सेंसर तैयार कर लिए गए हैं। इन्हें अलग-अलग देशों के समुद्र तट पर व्हेल मछलियों में लगाया जा रहा है।