पीजीआईएमएस में लंबे समय से ‘बेहोश’ पड़ी आपरेशन टेबलों को जल्द ही एनेस्थीसिया की नई मशीनें जागृत करने वाली हैं। संस्थान के पास एनेस्थीसिया की 15 नई मशीनें आई हैं। इससे बंद पड़ी आपरेशन टेबलों पर फिर से आपरेशन हो सकेंगे। इसका लाभ जहां मरीजों को मिलेगा, वहीं पीजी डॉक्टरों को भी आपरेशन टेबल अधिक होने से सर्जरी का अनुभव मिल सकेगा।
सूत्रों की मानें तो लंबे समय से संस्थान के कई आपरेशन टेबल बंद पड़े हैं। इसकी मुख्य वजह एनेस्थीसिया की मशीनों की खराबी था। दरअसल एनेस्थीसिया की मशीनों की मदद से मरीजों को आपरेशन से पहले बेहोश किया जाता है। आपातकालीन विभाग की चार टेबलों में से दो टेबल बंद पड़ी थीं। इसका लाभ शहर के निजी अस्पताल उठा रहे थे। संस्थान में फिलहाल एनेस्थीसिया की 15 नई मशीन आ गईं हैं। माना जा रहा है कि दो मशीनों को सबसे पहले आपातकालीन विभाग में लगाकर बंद आपरेशन टेबल को चलाया जाएगा। वहीं, अन्य मशीनों के बारे में अधिकारी मानते हैं कि वे ट्रामा सेंटर के लिए आईं हैं।
संस्थान में 20 से अधिक छोटे-बडे़ आपरेशन थियेटर हैं। इसमें जब एनेस्थीसिया की मशीन धीरे-धीरे खराब होने लगी तो आपरेशन के लिए मरीजों को लंबी तारीख मिलने लगी। फिलहाल मरीजों को 20 दिन से तीन माह तक की आपरेशन की तारीख मिलती है। जबकि संस्थान में एनेस्थीसिया सबसे बड़ा विभाग का है और सर्जन की भी यहां कोई कमी नहीं है।
पीजीआईएमएस में यूरोलॉजी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार ने भी इस बात को प्रमुखता से उठाया था। यही समस्या अन्य डॉक्टरों की भी है। संस्थान के कुछ डॉक्टरों को छोड़कर कई डॉक्टरों के पास स्वतंत्र आपरेशन टेबल नहीं हैं। एक डॉक्टर ने ओपन हाउस की बैठक में भी इस मुद्दे को उठाया था, इसके बाद ओपन हाउस की बैठक ही बंद कर दी।
छह माह से बंद है लेप्रोस्कोपी
सूत्रों का कहना है कि पिछले छह माह से संस्थान में लेप्रोस्कोपी का भी कार्य ढीला है। इसकी छह माह की वेटिंग चल रही थी। जबकि इससे मरीजों को बडे़ आपरेशन से बचाया जा सकता है।
बंद पड़े आपरेशन टेबल चलाएंगे
21 में से चार आपरेशन थियेटर नहीं चल पा रहे थे। अब 15 नई एनेस्थीसिया की मशीन आने से ये चारों आपरेशन टेबल चालू हो जाएंगी। शेष बची मशीनें ट्रामा सेंटर और मदर एंड चाइल्ड केयर अस्पताल के लिए हैं। इनके शुरू होने से मरीजों को काफी लाभ मिलेगा।
- डॉ. प्रशांत, प्रोफेसर इंचार्ज, पीआर विभाग, पीजीआईएमएस।