रोहतक। सुपवा के लैब टेक्नीशियन ने राजस्थान टूर पर गईं छात्राओं को ही छेड़छाड़ व ब्लैकमेल का शिकार बनाने का प्रयास नहीं किया, बल्कि वह पिछले तीन साल से ऐसा करता आ रहा था। ज्यूरी के नंबरों में पास करने के नाम पर छात्राओं पर यौन संबंध बनाने का दबाव बनाता था। यह खुलासा पुलिस की जांच में हुआ है। कैंपस में 25 अप्रैल को छात्रा के घर अश्लील वीडियो व फोटो भेजने के बाद फार्मेट किए गए मोबाइल का पुलिस ने बैकअप लिया है। इसमें वर्ष 2015 तक का रिकॉर्ड मिला है। इस रिकॉर्ड ने छात्राओं के उत्पीड़न की पर्तें खोलकर रख दी हैं।
पुलिस ने छात्राओं से छेड़छाड़ व ब्लैकमेल करने के मामले की जांच करते हुए आरोपी लैब टेक्नीशियन के मोबाइल को खंगाला। हालांकि, यह मोबाइल 25 अप्रैल को मैसेज भेजने के बाद ही फॉर्मेट कर दिए जाने की जानकारी है। इसे पुलिस ने तकनीकी सेल में जांच के लिए भेजा। यहां फोन के बैकअप को स्टोर किया गया। इसमें वर्ष 2015 तक का रिकॉर्ड मिलने की बात सामने आई है। इस रिकॉर्ड में राजस्थान मामले के पहले भी छात्राओं का उत्पीड़न किए जाने की बात सामने आई है। विद्यार्थियों ने 26 अप्रैल को हड़ताल करते हुए आरोपी से उसका फोन मांगा तो फोन के फार्मेट करने की बात सामने आई। बैकअप में फर्स्ट ईयर, सेकेंड और थर्ड ईयर की छात्राओं के अश्लील फोटो व वीडियो मिले हैं। लैब टेक्नीशियन ने इनके जरिये इन छात्राओं को भी अपना शिकार बनाने का प्रयास किया।
मोबाइल चैटिंग में हुआ ब्लैकमेलिंग का खुलासा
लैब टेक्नीशियन ने वर्ष 2015 से 19 बैच की छात्राओं को एक नहीं अनेक मैसेज भेजे। इनमें अश्लील मैसेज भी शामिल हैं। वह रात 12 से तीन बजे के बीच छात्राओं को मैसेज भेजता था। आरोपी की छात्राओं से हुई चैटिंग में यह साफ नजर आता है। कुछ छात्राओं के मोबाइल में मौजूद आरोपी की चैटिंग भी यही कह रही है। अमर उजाला के पास चैटिंग के स्क्रीन शॉट हैं, लेकिन नैतिकता को ध्यान में रखते हुए उन्हें यहां नहीं लिखा जा सकता।
बदनामी के डर से छात्राओं ने नहीं की शिकायत
सुपवा की छात्राओं ने बदनामी व पढ़ाई छूटने के डर से लैब टेक्नीशियन के खिलाफ कभी कोई शिकायत नहीं की। छात्राओं का आरोप है कि लैब टेक्नीशियन अक्सर रात को 12 से तीन बजे के बीच में मैसेज करता था। न्यू एडमिशन छात्राओं को यूनिवर्सिटी का माहौल ही इतना ओपन लगता था। इसलिए सर देर रात मैसेज कर देते हैं। यही सोच कर हमने मैसेज का जवाब दिया, मगर कुछ समय बाद ही मैसेज ब्लैकमेलिंग और धमकी में बदल गए। इस बारे में फैकल्टी या घर वालों को बताते तो हमें ही दोष दिया जाता।