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खाद बेचने का काम है खातों से कोई लेना देना नहीं

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इस्माइला को-ऑपरेटिव सोसायटी में किसान क्रेडिट कार्ड घोटाला
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- सेल्समैन बोला, मैं तो खाद बेचता हूं, किसानों के ऋण खातों से लेनादेना नहीं
- इस्माइला को-ऑपरेटिव सोसायटी के सेल्समैन पर घोटाला करने का संदेह जताया जा रहा है
- को-ऑपरेटिव सोसायटी के प्रबंधक के पास सिर्फ एक ही जवाब कि अभी चल रही है जांच

अमर उजाला ब्यूरो
सांपला।
इस्माइला प्राथमिक कृषि सहकारी समिति की शाखा में गिझी के सौ किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड बनाकर किए गए घोटाले का शक सोसायटी की ओर से खाद बेचने वाले सेल्समैन पर जताया गया था। सोसायटी ने उसे 28 मई तो नोटिस भेजकर इस बाबत पूछताछ की थी, जिसके जवाब में सेल्समैन का कहना है कि वह तो सिर्फ खाद बेचता है, किसानों के ऋण खातों से उसका कोई लेना-देना नहीं है। इसके साथ थी सेल्समैन के जवाब से को-ऑपरेटिव सोसायटी की कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। सेल्समैन ने कहा है कि ऋण संबंधी सारे रिकॉर्ड और जानकारी कार्यालय में है, जिस तक उसकी पहुंच नहीं है।
सोसायटी के सेल्समैन कप्तान सिंह ने कहा कि खाताधारकोें के ऋण रिकॉर्ड से उसका कोई संबंध ही नहीं है। उस पर आरोप लगाया गया है कि उसने ऋण खातों में छेड़छाड़ की है, जिस पर उसे नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया। उसने कहा कि ऋण संबंधी सारा रिकॉर्ड सोसायटी के रिकॉर्ड रूम में है, जिस तक उसकी पहुंच नहीं है। अधिकारी बेहतर पता लगा सकते हैं कि रिकॉर्ड से छेड़छाड़ किसने की है। उसने कहा कि वह किसी भी ऋण खाते से डील नहीं करता है। ऐसे में सोसायटी के अधिकारी ही सवालों के घेरे में आ गए हैं। सवाल यह है कि जब रिकॉर्ड रूम तक सिर्फ अधिकारियों की पहुंच तो खातों में किसी और के हेरफेर करने का सवाल ही नहीं उठता है। सोसायटी के प्रबंधक भूप सिंह ने भी पूरे मामले में चुप्पी साध रखी है, उनके पास पूरे मामले में सिर्फ इतना ही जवाब है कि मामले की जांच चल रही थी। जबकि प्रबंधक की अनुमति के बगैर किसान क्रेडिट कार्ड के तहत ऋण दिया जाना मुमकिन नहीं है।
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- इतना आसान नहीं है किसान क्रेडिट कार्ड लेना
जिस तरह बैंक के अधिकारियों ने सारे घोटाले का ठीकरा एक सेल्समैन के सिर फोड़ा है, किसान क्रेडिट कार्ड बनवाना उतना आसान भी नहीं है। एक केंद्रीय को-ऑपरेटिव बैंक होता है, जिसके अंतर्गत हर गांव में को-ऑपरेटिव सोसायटी किसानों को ऋण दिलाने का काम करती है। इसके लिए जरूरी है कि किसान को-ऑपरेटिव सोसायटी का सदस्य हो। किसान एक हजार रुपये देकर सोसायटी का सदस्य बनता है, जिसके बाद भी ऋण के लिए आवेदन कर सकता है। इससे पहले किसान को गांव में मौजूद अन्य बैंकों से एक एनओसी भी लाकर को-ऑपरेटिव सोसायटी को देनी होती है कि उस पर कोई अन्य लोन है या नहीं। इसके देने के बाद ही को-ऑपरेटिव बैंक से किसान क्रेेडिट कार्ड बनता है, जिससे तहत 50 हजार रुपये तक का लोन मिलता है। ऐसे में, को-ऑपरेटिव सोसायटी के अधिकारी भी सवालों के घेरे में आ रहे हैं।
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- सोसायटी विभाग की ओर से इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर ने की जांच
को-ऑपरेटिव सोसायटी विभाग के डीओ संजीव ने प्रबंधक से ऋण लेने वालों समेत अन्य डाटा इस्माइला सोसायटी से मांगा है। इसके साथ ही विभाग की इंस्पेक्टर बबीता और सब इंस्पेक्टर मंगलवार को रिकॉर्ड चेक करने के लिए इस्माइला सोसायटी पहुंचे थे।
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