किसान को पपीता बेचने को लेकर परेशान नहीं होना पड़ता। खेत में रहकर ही वे पपीता बेच लेते हैं। ज्यादातर पपीता व्यापारी खेत में आकर खरीदकर ले जाते हैं। कुछ पपीता वे स्थानीय बाजार में ले जाकर बेचते हैं। बाजार में इसकी अच्छी कीमत मिलती है। स्थानीय व्यवसायियों की डिमांड भी रहती है। पपीता के एक पेड़ से 10 से 15 दाने मिलते हैं, जिससे कम पूंजी में इसकी अच्छी फसल होती है।
जयबीर ने बताया कि इसकी खेती करना आसान है। इसमें लागत कम लगती है, मुनाफा अच्छा होता है। पपीते की खेती करते हुए हमने एक साल में लाखों रुपये से अधिक का फायदा किया है। पपीते के पेड़ में करीब 40 से 50 किलो तक फल लगता है और इसकी कीमत मंडी में आमतौर पर 20 से 30 रुपये प्रति किलो होती है।
पपीते के पौधों में बीमारियां भी लगती है कम किसान परंपरागत खेती छोड़कर बागवानी की तरफ रुख कर रहे हैं। सरकारी योजनाओं से लाभान्वित किसानों को समृद्ध किया जा रहा है। समय समय पर गांवों में सेमिनार के माध्यम से जागरूक भी किया जा रहा है। पपीते की खेती का फरवरी, मार्च, जुलाई, अगस्त में सबसे अच्छा समय माना गया है।
सरकार की ओर से पहली बार पपीते की खेती करने पर 30 हजार 500 रुपये व दूसरी बार खेती करने पर 12 हजार 500 रुपये अनुदान राशि दी जा रही है। पपीते की खेती मुनाफे की खेती है इसमें कम लागत में अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है और इन पौधों में बीमारियां भी कम होती है। - डॉ. निकेश भुक्कल, बागवानी अधिकारी कलानौर।