फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पपीते की खेती: लागत कम, मुनाफा ज्यादा; रोहतक के सेना से रिटायर जयबीर सिंह ने बताया सफलता का राज

Mon, 25 Dec 2023 11:21 AM IST
नवीन दलाल कमलजीत सिंह, कलानौर (हरियाणा)

सार

जयबीर सिंह ने बताया कि एक एकड़ में अगर मंडी में भाव अच्छा मिले तो करीब पांच लाख रुपये सालाना की कमाई है, जिसमें से करीबन 80 हजार रुपये लागत है, साथ ही बागवानी विभाग से भी एक एकड़ पर 3 साल में 43 हजार रुपये सब्सिडी के रूप में मिल जाते हैं।
विज्ञापन
किसान जयबीर सिंह - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सेहतमंद बनाए रखने के लिए फलों में पपीता अहम होता है। इसी पपीते की खेती से किसान मालामाल भी हो रहे हैं। इसमें लागत कम लगती है, मुनाफा अच्छा होता है। प्रदेश में परंपरागत खेती छोड़कर अलग से हटकर जिस किसान ने खेती की है, वह कभी घाटे में नहीं गया है। कलानौर के गांव माडौदी में इन दिनों मिट्टी वरदान बनी हुई है।

विज्ञापन


पपीते की खेती का फरवरी, मार्च, जुलाई और अगस्त में सबसे अच्छा समय
खंड के बल्लम गांव के 10वीं पास किसान जयबीर सिंह पुत्र चौधरी कपूर सिंह अहलावत ने 31 साल सेना में नौकरी की। वर्ष 2019 में रिटायरमेंट के बाद जमीन से जुड़े रहने के लिए माडौदी गांव में 22 एकड़ जमीन लीज पर ली और इस पर बाग लगाया। इसमें पहले अंगूर और अमरूद की खेती की। उसी बाग में पपीते के पौधे रोपे गए। पपीते से बचत आनी शुरू हुई तो करीबन सात एकड़ में अलग से पपीते की खेती शुरू कर दी। दिसंबर में दो एकड़ में पपीते की फसल मंडी में जाने के लिए तैयार हो चुकी है तो वहीं चार एकड़ में पपीते की फसल अप्रैल तक तैयार हो जाएगी।

एक एकड़ में पांच लाख रुपये तक की सालाना कमाई
जयबीर सिंह ने बताया कि एक एकड़ में अगर मंडी में भाव अच्छा मिले तो करीब 5 लाख रुपये सालाना की कमाई है, जिसमें से करीबन 80 हजार रुपये लागत है, साथ ही बागवानी विभाग से भी एक एकड़ पर 3 साल में 43 हजार रुपये सब्सिडी के रूप में मिल जाते हैं। जयबीर ने बताया कि समय-समय पर बागवानी विभाग से डॉक्टर की टीम पेड़ों की जांच के लिए आती है। बीमारियों से बचाव के लिए जागरूक भी करती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

खेत से पपीता खरीदकर ले जाते हैं व्यापारी

किसान को पपीता बेचने को लेकर परेशान नहीं होना पड़ता। खेत में रहकर ही वे पपीता बेच लेते हैं। ज्यादातर पपीता व्यापारी खेत में आकर खरीदकर ले जाते हैं। कुछ पपीता वे स्थानीय बाजार में ले जाकर बेचते हैं। बाजार में इसकी अच्छी कीमत मिलती है। स्थानीय व्यवसायियों की डिमांड भी रहती है। पपीता के एक पेड़ से 10 से 15 दाने मिलते हैं, जिससे कम पूंजी में इसकी अच्छी फसल होती है।

जयबीर ने बताया कि इसकी खेती करना आसान है। इसमें लागत कम लगती है, मुनाफा अच्छा होता है। पपीते की खेती करते हुए हमने एक साल में लाखों रुपये से अधिक का फायदा किया है। पपीते के पेड़ में करीब 40 से 50 किलो तक फल लगता है और इसकी कीमत मंडी में आमतौर पर 20 से 30 रुपये प्रति किलो होती है।

पपीते के पौधों में बीमारियां भी लगती है कम किसान परंपरागत खेती छोड़कर बागवानी की तरफ रुख कर रहे हैं। सरकारी योजनाओं से लाभान्वित किसानों को समृद्ध किया जा रहा है। समय समय पर गांवों में सेमिनार के माध्यम से जागरूक भी किया जा रहा है। पपीते की खेती का फरवरी, मार्च, जुलाई, अगस्त में सबसे अच्छा समय माना गया है।

सरकार की ओर से पहली बार पपीते की खेती करने पर 30 हजार 500 रुपये व दूसरी बार खेती करने पर 12 हजार 500 रुपये अनुदान राशि दी जा रही है। पपीते की खेती मुनाफे की खेती है इसमें कम लागत में अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है और इन पौधों में बीमारियां भी कम होती है। - डॉ. निकेश भुक्कल, बागवानी अधिकारी कलानौर।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें