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पीजीआई में कोरोना से मौतों का आंकड़ा सही होने का दावा, 34 फाइलें मिलीं

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पीजीआई ने कोरोना से मौतों का आंकड़ा सही होने का दावा किया है। महामारी में मरने वाले मरीजों की 34 फाइलें संस्थान में ही होने की बात कही गई है। इनमें से कुछ फाइलें रिकॉर्ड में जमा तो कुछ इधर-उधर रखी मिली हैं। फाइलें जमा कराने के बाद मरीजों का पंजीकरण नहीं हो पाने की वजह ये मौतों के आंकड़े में गड़बड़ी हुई। अब दो दिन की मशक्कत के बाद यह रिकॉर्ड दुरुस्त करने के साथ पंजीकरण का काम पूरा किया जा रहा है। यह दावा पीजीआई के निदेशक डॉ. रोहताश कंवर यादव ने किया है। वे मंगलवार को इस मामले में अमर उजाला से बातचीत कर रहे थे।
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निदेशक का दावा है कि कोरोना डेथ केस को लेकर पीजीआई प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। पहले भी मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य लाभ दिया गया है और भविष्य में भी यह व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया जाएगा। कोविड में भी स्वास्थ्य कर्मचारियों ने जी जान से काम किया। पुरानी फाइलों का रिकॉर्ड खंगालने व तलाशने का काम पूरा हो गया है। संस्थान में ही उधर-उधर रखीं ये फाइलें तलाश कर ली गईं हैं। ऐसी 34 फाइलें बताई गई हैं। इन्हें रिकॉर्ड से मिलान कर सुरक्षित रख दिया गया है। अब तक की जांच में सामने आया है कि ये फाइलें बनाए जाने के बाद एक तरफ रख दी गई या जमा करा दी गई, मगर इनका पंजीकरण नहीं कराया गया। फाइलें जमा कराने पर संबंधित चिकित्सक को नो ड्यूज भी जारी कर दिया गया। ज्यादातर फाइलें रिकॉर्ड में ही जमा मिली हैं। कुछ फाइलें इधर-उधर रखी मिली। अब इनके पंजीकरण का कार्य पूरा किया जा रहा है।
14 दिन में प्रमाण पत्र देने के लिए पंजीकरण जरूरी
नियमानुसार, निर्धारित 14 दिन की अवधि में जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करना होता है। इसके लिए फाइल जमा कराने के साथ संबंधित मरीज का पंजीकरण कराना जरूरी है। संस्थान के विद्यार्थियों ने अज्ञानता वश फाइल जमा कराने के बाद पंजीकरण नहीं कराया। इस कारण मामला गड़बड़ा गया। शुरू में लोगों ने भी परवाह नहीं की। सरकार ने मुआवजे की घोषणा की तो लोगों ने अपने प्रमाण पत्र मांगने शुरू कर दिए। जबकि बगैर पंजीकरण प्रमाण देना मुश्किल है।
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प्रशासन को दो दिन करनी पड़ी मशक्कत
कोरोना से हुई मौतों का आंकड़ा दुरुस्त करने में पीजीआई प्रशासन को दो दिन तक मशक्कत करनी पड़ी। संस्थान निदेशक, एमएस, डीएमएस समेत अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों ने पुरानी फाइलों का खंगाला। रिकॉर्ड का मिलान फाइलों से किया गया। इधर-उधर हुई फाइलें तलाशी गई। इसके लिए रविवार को भी कार्यालय खोला गया। अब दो दिन की मशक्कत के बाद रिकॉर्ड पूरा करने का दावा किया गया है।
आंकड़े में गड़बड़ी की सात वजह
कोरोना से हुई मौतों का आंकड़ा गड़बड़ाने की सात मुख्य वजह बताई जा रही है। इसमें कोविड मरीजों का एक साथ बड़ी संख्या में पीजीआई आना, संस्थान के चिकित्सकों की करनाल व अन्य केंद्रों पर ड्यूटी लगाना, शिक्षकों को क्लीनिकल ड्यूटी पर लगाना, एमडी की परीक्षाएं, अस्पताल से बाहर हुई मौत के मामले, बगैर कोविड पुष्टि शवों का अंतिम संस्कार, श्मशान घाट में शव जलाने की अपर्याप्त जगह मुख्य है।
संस्थान के 1586 स्वास्थ्य कर्मी हुए बीमार
कोरोना काल में संस्थान के स्वास्थ्य कर्मी बड़ी संख्या में संक्रमित हुए। मार्च 2020 से दो अक्तूबर 2021 तक 1586 कर्मचारी संक्रमण के चलते अस्पताल में भर्ती किए गए। इनमें अप्रैल 2021 में 700 व मई में 303 मरीज थे। संस्थान के स्वास्थ्य कर्मियों में से 655 डॉक्टर, 139 विद्यार्थी, 361 स्टाफ नर्स, 170 पैरामेडिकल स्टाफ, 159 बीयरर व स्वीपर व 102 मिनिस्ट्रियल स्टाफ है।
आयोग ने मांगा है जवाब
हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग को उपायुक्त की ओर से भेजी गई ईमेल के बाद पीजीआई प्रशासन से कोरोना मौतों के सही आंकड़े पर जवाब तलब किया गया है। उपायुक्त की शिकायत में फाइल गुम होने के कारण आंकड़ा गलत होना बताया गया है। इस कारण उनके पास पीजीआई की ओर से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी नहीं करने संबंधी शिकायतें आ रही थी।
पीजीआई में कोराना से हुई मौतों के आंकड़े में कोई गड़बड़ी नहीं है। इसकी जांच कर ली गई है। आंकड़ों में 34 फाइलें कम थी। ज्यादातर फाइलें रिकॉर्ड में जमा मिली हैं। कुछ फाइलें इधर-उधर थी। उन्हें भी रिकॉर्ड में जमा करा दिया गया है। फाइलें जमा होने के बाद इनका पंजीकरण नहीं हो पाया था। इसलिए थोड़ी दिक्कत हुई। अब व्यवस्था दुरुस्त कर दी गई है। भविष्य में बेहतर व्यवस्था बनाने के लिए सभी एचओडी व विभागों को पत्र जारी कर दिया गया है।
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- डॉ. रोहताश कंवर यादव, निदेशक, पीजीआईएमएस
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