लघु सचिवालय के गेट के पास अपनी मांगो को लेकर नारेबाजी करते किसान। संवाद
रोहतक। संयुक्त किसान मोर्चा से जुडे़ किसान संगठनों ने सोमवार को लघु सचिवालय के बाहर गेट पर धरना दिया। इस दौरान उन्होंने तीन कृषि कानून बिलों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन वापसी के दौरान किए गए वादों को पूरा न करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि समिति बनी न मुकदमे वापस हुए, सरकार पर भरोसा कैसे करें। उन्होंने सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप लगाते हुए चेताया कि यदि सरकार ने वादे पूरे नहीं किए तो संयुक्त मोर्चा आंदोलन से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन डीसी कार्यालय में सौंपा।
संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर किसान संगठन ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन से जुडे़ किसान, मजदूरों ने सोमवार सुबह सचिवालय गेट पर पहुंचकर शांतिपूर्ण धरना शुरू कर दिया। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष अनूप सिंह ने बताया की केंद्र की सरकार अपने चहेते पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए तीन काले कानून बनाए थे लेकिन दिल्ली में चले किसानों के लंबे आंदोलन के चलते उन्हें ये वापस लेने पडे़। वार्ता के दौरान सरकार ने एमएसपी की कानूनी गारंटी को लेकर एक कमेटी गठित करने की बात की थी लेकिन अब सरकार उससे पीछे हट रही है। राष्ट्रीय अध्यक्ष कामरेड सत्यवान ने कहा कि सरकारी पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए मंडियों को बंद कर रही है और दो बड़े घरानों से किसानों को जोड़ना चाहती है। बिजली के बिल भी अभी लंबित हैं और अभी तक किसानों पर दर्ज केस वापस नहीं लिए गए। यूपी के लखीमपुर खीरी में हुई वारदात केहत्यारे जमानत पर बाहर घूम रहे हैं और निर्दोष किसान जेलों में बंद है।
ऑस्ट्रेलिया के साथ मुक्त व्यापार समझौते से डेरी किसान के अस्तित्व पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। जैव विविधता कानून 2002 में संशोधन से किसानों की जैविक संपदा को खतरा है। आरोप लगाया कि एफसीआई के नए गुणवत्ता मानक से फसल की खरीद में कटौती की कोशिश की जा रही है। अब भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड के नियम बदल कर पंजाब और हरियाणा सरकार द्वारा मनोनीत प्रतिनिधियों की जगह केंद्र सरकार की पसंद मुताबिक सदस्य लगाने का फैसला किसान और देश की संघीय व्यवस्था पर एक और हमला है। धरने पर रामफल सुहाग, उमेश मौर्य व राजेश, रामू हुड्डा आदि शामिल थे।