कोरोना की तीसरी सशंकित लहर के आने से पूर्व देश में दो से 18 साल तक के बच्चों को आपातकालीन उपयोग प्राधिकरण (ईयूए) की ओर से कोवैक्सीन लगाने की मंजूरी मिल गई है। अब होेने वाला टीकाकरण बड़ों के टीकाकरण से अलग होगा और सभी टीकाकरण सेंटरों पर वेटिंग रूम, उपचार की व्यवस्था और डॉक्टर एवं स्टाफ की तैनाती अनिवार्य होगी। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी व्यवस्था पहले ही रखना अनिवार्य रहेगा। यह जानकारी पीजीआईएमएस में कोवैैक्सीन अनुसंधान कमेटी के प्रोफेसर डॉ. रमेश वर्मा ने दी।
डॉ. वर्मा ने अमर उजाला को विशेष बातचीत में बताया कि 18 प्लस आयु वर्ग वालों की तरह अब दो साल तक के बच्चे को भी को वैक्सीन लगाई जाएगी। बच्चों को भी बड़ों की तरह .5 एमएल वैक्सीन की डोज लगेगी, इसमें खास होगा कि हर जगह टीकाकरण नहीं होगा। इसके लिए सुविधाओं से युक्त टीकाकरण सेंटर ही होंगे। क्योंकि किसी बच्चे को टीका लगने के बाद यदि कोई समस्या आती है तो उसका समाधान तुरंत किया जाएगा। देश में 525 बच्चों पर अनुसंधान पूरा होने के बाद ही इसे मंजूरी मिली है। विशेषज्ञ ने बताया कि टीका लगने के बाद मांसपेशियों में दर्द, बुखार, दस्त जैसे सामान्य लक्षण आ सकते हैं। यह 78 प्रतिशत कोरोना वायरस से लड़ने में कारगर है। इससे घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि को-वैक्सीन किल्ड वैक्सीन है। यह देश में 95 करोड़ लोगों को लग चुकी है। इसके वायरस को केमिकल में किल किया जाता है और बाद में इसे वैक्सीन के रूप में लगाया जाता है।
बड़ों को अनुसंधान में शामिल कर चुकी है पीजीआईएमएस की टीम
पीजीआईएमएस में कोवैक्सीन के अनुसंधान में डॉ. सविता वर्मा व डॉ. रमेश वर्मा शामिल रहे। टीम ने संस्थान में चले पहले फेज के अनुसंधान में 375, दूसरे फेज में 380 व तीसरे फेज में 26 हजार से अधिक लोगों को वैक्सीन लगाई। गौरतलब है कि संस्थान का कोवैक्सीन के अनुसंधान में काफी योगदान रहा है।