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यूक्रेन में धमाकों की दहशत से बंकरों में छिपे, ब्रेड-बिस्कुट और पानी से भरा पेट

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यूक्रेन से लौटने पर अपने परिवार के साथ लवली सचदेवा। विज्ञप्ति
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24 फरवरी को रूस के हमले का माहौल बनते ही छात्र हॉस्टल के नीचे बने बंकर में छिप गए। करीब 200 छात्र वहां पहुंच गए। बंकर में भीड़ जमा हो गई। लेटना तो दूर बैठने तक की जगह नहीं मिली। शरीर बुरी तरह टूट चुका था। भूख के मारे बुरा हाल था। रुक-रुक कर धमाकों की आवाज आती तो दिल दहल जाता। रात के अंधेरे में जान जोखिम में डालकर बाहर निकलते और हॉस्टल के कमरे में जाकर बिस्कुट-ब्रेड और पानी से काम चलाया। छह-सात दिन ऐसे ही चला। केंद्र सरकार की मदद से शुक्रवार को जिले के 13 लोग यूक्रेन से लौटे हैं। प्रशासन के अनुसार, अब तक यूक्रेन से 101 में से 51 की वापसी हो चुकी है।
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शुक्रवार को यूक्रेन से लौटे रोहतक के छात्रों ने रूस के हमले के बाद वहां आपबीती अमर उजाला को बताई। शहर की गोपाल कॉलोनी निवासी लवली सचदेवा ने बताया कि वो खारकीव में एमबीबीएस तृतीय वर्ष की पढ़ाई कर रहा है। 24 फरवरी को रूस के हमले की खबर आई तो छात्र बाजार से खाने-पीने की चीजों का स्टॉक करने लगे। वह भी बिस्कुट, ब्रेड, कॉफी लेकर आ गए। हमले शुरू हुए तो हॉस्टल के नीचे बंकर में छिप गए। बंकर पूरी तरह भर गया था। रात को अंधेरा होता तो कुछ छात्र हिम्मत करके कमरे में जाकर खाने का सामान लाते। एक-दूसरे के साथ मिल बांटकर खाते थे। उन्होंने सात दिन बिस्कुट और ब्रेड खाई और पानी पीकर पेट भरा। कई बार बम धमाकों की आवाज सुनाई दी तो छात्र दहशत में सहम गए। बंकर में सन्नाटा हो जाता था लगता था कि अब जान नहीं बचेगी, लेकिन भारतीय एंबेसी से लगातार संपर्क रहा। दो मार्च को ट्रेन से पोलैंड पहुंच गए। एंबेसी ने वहां एक होटल में भारतीय छात्रों के रुकने और खाने का पूरा प्रबंध किया था। तीन मार्च की रात को उन्हें फ्लाइट मिली और शुक्रवार दोपहर को लौटे। पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर ने भी उनकी मदद की। शुक्रवार को दिल्ली एयरपोर्ट पर उसे लेने मम्मी ममता, बहन श्रेया, भाई नीरज और हिमांशु गए। उसके पहुंचते ही सबने उसे गले से लगा लिया।
सामान वहीं छोड़ा, सिर्फ जरूरी दस्तावेज लेकर लौट आए
शहर के कमला नगर निवासी निकिता कीव में एमबीबीएस की चौथे साल की पढ़ाई कर रही थी। निकिता शुक्रवार को लौटी तो चेहरे पर खुशी थी। दिल्ली एयरपोर्ट पर ही परिजन लेने पहुंचे थे। निकिता ने बताया कि उन्होंने पांच मार्च को इंडिया में आने की तैयारी की थी, लेकिन इससे पहले ही हमला हो गया। 24 फरवरी को हमला होते ही वे हॉस्टल के नीचे बने बंकर में छिप गए। पूरा बंकर छात्रों से भरा था। चार दिन तक यही रहे। ब्रेड खाकर ही काम चलाया। 28 फरवरी को उनका भारतीय एंबेसी से संपर्क हुआ। उन्हें कहा गया कि वे अपने देश का झंडा लेकर रेलवे स्टेशन तक चले जाएं, उन्हें कोई कुछ नहीं कहेगा। उन्होंने ऐसा ही किया। अपने जरूरी कागजात लेकर बाकी सामान अपने कमरे में छोड़कर वह निकल गए और फ्लाइट से आने का इंतजाम किया। शुक्रवार को नई दिल्ली हवाई अड्डे पर पहुंची तो परिजन उसे यहां लेकर आए। परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं था।
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शुक्रवार को ये विद्यार्थी यूक्रेन से लौटे
आशुतोष, अर्पित हुड्डा, हर्ष, नवदीप, गरिमा, श्रीओम, श्रवण, लवली सचदेव, आर्यन, निकिता, शुभम, प्रिंस।
वर्जन
जिले के 101 लोगों के यूक्रेन में होने की सूचना मिली है। इनकी सरकार के स्तर से वापसी की व्यवस्था की जा रही है। शुक्रवार को 13 लौटे हैं। इस तरह अब तक 51 विद्यार्थी लौट चुके हैं। बाकी की वापसी के लिए भी सरकार के स्तर से प्रयास किए जा रहे हैं। दूतावास भी छात्रों के संपर्क में है। जिला प्रशासन भी परिजनों से संपर्क कर उनकी मदद कर रहा है।
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- राकेश कुमार, एसडीएम
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