नगर निगम में बुधवार को प्रॉपर्टी टैक्स विभाग के कंप्यूटर सिस्टम में किसी ने सेंध लगा दी। इस दौरान ढाई घंटे में आवेदित 33 फाइलें अधिकृत (एप्रूव्ड) कर दी गईं। मजे की बात है कि जेडटीओ-दो (क्षेत्रीय कराधान अधिकारी) को इसकी जानकारी तक नहीं हुई। गड़बड़ी की आशंका पर उन्होंने संयुक्त आयुक्त से मामले की शिकायत की है। इस पर संयुक्त आयुक्त ने अधिशासी अभियंता को जांच सौंपते हुए कार्रवाई के आदेश दिए हैं। उन्होंने पासवर्ड लीक होने की आशंका जाहिर की है।
नगर आयुक्त डॉ. नरहरि बांगड़ ने प्रॉपर्टी टैक्स विभाग में शिकायतों के समाधान को गंभीरता से लिया है। उन्होंने 22 वार्डों को बांटकर दो जेडटीओ तैनात कर दिए हैं। जेडटीओ-1 जगदीश शर्मा को वार्ड-एक से 10 तक और जेडटीओ-2 अंकित गुलिया को वार्ड-11 से 22 तक सौंपा है। जेडटीओ अंकित गुलिया की कुछ दिन पहले ही अधिकारियों के आदेश पर प्रॉपर्टी टैक्स विभाग की आईडी बनाई गई है ताकि वह शिकायतों व आवेदनों का निस्तारण कर सकें।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार जेडटीओ-2 अंकित गुलिया मंगलवार की सुबह दफ्तर पहुंचे। उन्होंने अपनी प्रॉपर्टी टैक्स विभाग की आईडी खोली तो उन्हें 33 आवेदन दिखाई दिए। इस दौरान मौके पर कुछ लोग प्रॉपर्टी टैक्स के बाबत काम कराने के लिए आ गए। इस पर जेडटीओ ने आईडी बंद करके काम निपटाना शुरू कर दिया। करीब डेढ़ घंटे बाद दोबारा आईडी खोली तो 21 आवेदन अधिकृत (एप्रूव्ड) और 12 अनधिकृत (अनएप्रूव्ड) दिखाई दिए। गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए उन्होंने तुरंत ही समकक्ष साथियों से संपर्क साधा। जब उन्होंने फिर आईडी खोली तो उसमें सिर्फ एक ही अनधिकृत आवेदन दिखा, जो दोपहर में अधिकृत (एप्रूव्ड) हो गया। उन्होंने तुरंत ही इसकी सूचना डीएमसी हरदीप और संयुक्त आयुक्त सुरेश कुमार को दी। इसके बाद जेडटीओ ने आईडी से बिना जानकारी आवेदन अधिकृत होने की शिकायत पर संयुक्त आयुक्त से की। उन्होंने बड़ी गड़बड़ी की आशंका जाहिर करते हुए जांच की मांग की है। इस पर संयुक्त आयुक्त ने अधिशासी अभियंता योगराज छिकारा को जांच करके कार्रवाई सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं।
संयुक्त आयुक्त सुरेश कुमार ने जेडटीओ-दो के लीक किए गए आईडी के पासवर्ड से आवेदन अधिकृत होने की आशंका जाहिर की है। उन्होंने बताया कि मामले की जांच की जा रही है, जो भी दोषी मिलेगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पार्षदों ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर किया था बैठक का बहिष्कार
रोहतक। नगर निगम हाउस की 28 सितंबर को बुलाई गई बैठक का पार्षदों ने प्रॉपर्टी टैक्स विभाग में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए बहिष्कार किया था। नगर निगम में पार्षदों ने जांच की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन किया, जो तीसरे दिन जांच के आश्वासन के बाद खत्म हुआ था। पार्षदों ने आरोप लगाया कि प्रॉपर्टी टैक्स विभाग में भ्रष्टाचार हावी है। फर्जी आईडी बनाकर निगम को आर्थिक नुकसान पहुंचाया जा रहा है। पार्षदों के आरोपों की जांच सीटीपी केके वार्ष्णेय को सौंपी गई है।