चीन के हांगझोऊ में हुए एशियाई खेलों में भारत के प्रदर्शन का विश्व में शोर है, मगर इस शोर के बीच रोहतक के संदीप ठकराल ने शांति से ब्रिज में रजत पदक जीत लिया। फाइनल में हांगकांग की जोड़ी उन पर भारी पड़ी। उसने शुरू से ही बढ़त बनाए रखते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया। इसके बाजवूद पूरी प्रतियोगिता में भारतीय दल का प्रदर्शन काबिलेतारीफ रहा।
भारतीय टीम में रोहतक के किला रोड के मूल निवासी और वर्तमान में गुरुग्राम में रहने वाले संदीप ठकराल ने हांगझोऊ से अमर उजाला को बताया कि भारतीय खिलाड़ियों का फाइनल मुकाबला हांगकांग के साथ हुआ। इसमें 152-231 स्कोर रहा। उनके अलावा जग्गी शिवदासनी, राजू तोलानी व अजय प्रभाकर खरे भी भारतीय दल में रहे। फाइनल मुकाबले में हांगकांग के खिलाड़ियों ने पहले सत्र से ही बढ़त बना ली थी और लगातार हावी रहे। पूरी प्रतियोगिता के दौरान हमारा प्रदर्शन शानदार रहा। देश की ओर से ब्रिज टीम में प्रतिनिधित्व करना गर्व की बात है। इस बार रजत पदक जीतने से भारतीय दल में उत्साह है।
ब्रिज इवेंट 27 सितंबर को हांग्जो क्यूई-युआन शतरंज हॉल में शुरू हुआ था। पूरा इवेंट तीनों श्रेणियों में हुआ। फाइनल 6 अक्तूबर को खेला गया। ब्रिज को 2018 में एशियाई खेलों में शामिल किया गया था। इसमें छह श्रेणियां शामिल थीं - पुरुष जोड़ी, पुरुष टीम, महिला जोड़ी, मिश्रित टीम, मिश्रित जोड़ी और सुपरमिक्स टीम। हालांकि इस बार पुरुष, महिला और मिश्रित टीम सिर्फ तीन श्रेणी ही शामिल की गई हैं।
2018 में भी आए थे 3 पदक
जकार्ता में 2018 एशियाई खेलों में भारत की ब्रिज टीम ने तीन पदक जीते थे। प्रणब बर्धन और शिभनाथ सरकार ने पुरुष जोड़ी में स्वर्ण पदक जीता, जबकि पुरुष और मिश्रित टीमों ने अपने-अपने वर्ग में कांस्य पदक जीते थे। जकार्ता 2018 के सभी पदक विजेता सुमित मुखर्जी, जग्गी शिवदासानी और राजेश्वर तिवारी, किरण नादर, बी सत्यनारायण, हिमानी खंडेलवाल और राजीव खंडेलवाल हांगझोऊ में भी एक्शन में रहे। इस टीम में इस बार रोहतक के संदीप ठकराल भी शामिल थे।
16वीं शताब्दी से खेला जा रहा
16वीं शताब्दी से ब्रिज खेला जा रहा है। यह खेल राजघरानों से बाहर निकला तो बड़े खानदानी लोग शान के तौर पर इसे खेला करते थे। इसकी पंचलाइन ब्रिज ऑफ पीस यानी शांति के लिए रास्ता बनाना है। साल 1958 में ओस्लो में वर्ल्ड ब्रिज फेडरेशन की स्थापना हुई, लेकिन एशियाड को इस खेल में 2018 में ही जगह मिल पाई है।