करीब ढाई दशक पहले 1997 में शहर में सिलसिलेवार ढंग से हुए बम धमाकों के आरोपी अब्दुल करीम टुंडा की शुक्रवार को अदालत में पेशी नहीं हो सकी। क्योंकि तकनीकी गड़बड़ी के कारण गाजियाबाद की डासना जेल से संपर्क नहीं हो सका। एडीजे आरके यादव की अदालत ने जेल अधीक्षक को प्रोडक्शन वारंट जारी करके हिदायत दी है कि 20 अगस्त को अब्दुल करीम टुंडा की वीडियो कांफ्रेंसिंग से अदालत में पेशी करवाई जाए।
मामले के अनुसार 1997 में शहर की पुरानी सब्जी मंडी में एक सब्जी विक्रेता की फड़ी पर अचानक धमाका हुआ। धमाके में कई सब्जी विक्रेता व ग्राहक घायल हो गए। बम धमाकों से जिला प्रशासन भी सकते में आ गया। पुलिस बम धमाके की जांच पड़ताल कर ही रही थी कि किला रोड पर एक रेहड़ी पर धमाका हो गया। इस संबंध में सिटी थाने में केस दर्ज किया गया था। तीन साल बाद मामले में दिल्ली पुलिस ने एक युवक को काबू किया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि बम धमाकों में यूपी निवासी अब्दुल करीम टुंडा का हाथ है, लेकिन उस समय तक अब्दुल करीम पाकिस्तान के कराची शहर में जा चुका था। डेढ़ दशक बाद जब अब्दुल करीम टुंडा नेपाल के रास्ते भारत आया तो उसे दिल्ली पुलिस ने बॉर्डर पर गिरफ्तार कर लिया था। दिल्ली से रोहतक पुलिस आरोपी को प्रोडक्शन वारंट पर लेकर आई। तभी से उसके खिलाफ जिला अदालत में बम धमाकों का केस चल रहा है। सुरक्षा के लिहाज से उसे गाजियाबाद की डासना जेल में रखा गया है।
नहीं आए गवाह, सही पता दे पुलिस
केस में गवाही की प्रक्रिया चल रही है। शुक्रवार को दो महिलाओं सहित तीन गवाहों को कोर्ट में पेश होना था, लेकिन गवाह पहले काठमंडी में रहते थे। अब वहां से दूसरी जगह चले गए हैं। समन भेजने के लिए सही पता तक उपलब्ध नहीं है। अदालत ने सब्जी मंडी थाना प्रभारी को हिदायत दी कि वे गवाहों का सही पता उपलब्ध कराएं, ताकि समय पर गवाहों को समन भेजकर अदालत में बुलाया जा सके।