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पीजीआई में एमबीबीएस और बीडीएस की काउंसिलिंग में हंगामा, निदेशक को घेरा

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अमर उजाला ब्यूरो
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रोहतक। डेरा मुखी मामले के चलते दो बार रद्द हुई एमबीबीएस और बीडीएस की काउंसिलिंग जब बुधवार को पीजीआई में दोबारा शुरू हुई तो परिजनों और विद्यार्थियों ने हंगामा काट दिया। अव्यवस्थाओं से परेशान होकर परिजनों और कुछ छात्राओं ने संस्थान के खिलाफ भ्रष्टाचार तक का आरोप लगा दिया। छात्राओं का कहना था कि नियमों को ताक में रखकर काउंसिलिंग की जा रही है और अधिकारी अपने चहेतों की काउंसिलिंग कर रहे हैं। वहीं निदेशक को जाते समय परिजनों ने घेरकर भेदभाव का आरोप लगाया। वहीं देर रात तक नंबर न आने की वजह से अभ्यर्थी काउंसिलिंग के लिए परेशान रहे।
बुधवार को संस्थान में सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों की एमबीबीएस और बीडीएस की सीटों के लिए एक साथ काउंसिलिंग की गई। इसमें अव्यवस्था से परेशान रात को नौ बजे एक छात्रा की सीट रद्द होने पर उसके परिजनों ने जमकर बवाल काटा। यहां संस्थान के निदेशक को जाते समय रोका लिया और बहस शुरू हो गई। परिजनों ने अधिकारी विद्यार्थी की सीट रद्दा होने की वजह पूछी। इस पर अधिकारी जांच कराने की बात कह कर मौके से चले गए। बहादुरगढ़ से आए परिजनों ने बताया कि उनकी बेटी का प्रदेश में 210 रैंक है। नियम के अनुसार उनकी बेटी का एडमिशन भी हो गया था। महज, फीस का डिमांड ड्राफ्ट जमा करवाना बाकी रह गया था। उसे बाद में जानकारी दी गई कि उसकी कागजी कार्रवाई अधूरी रह गई है। वह जब संस्थान वापस पहुंची तो पता चला कि उसकी सीट रद्द हो गई है। जब इस कारण के बारे में पूछा गया तो बताया कि कई बार घोषणा के बाद उनकी सीट रद्द कर दी गई। गौरतलब है कि अधिकारियों की तरफ से पहले ही निर्देश जारी किए गए थे कि चयनित अभ्यर्थियों को मौके पर ही अपनी पूरी फीस का ड्राफ्ट जमा कराना होगा। एमसीआई की गाइडलाइन के अनुसार यह नियम अनिवार्य करना संस्थान के लिए जरूरी था। संस्थान की मानें तो दो दिन में होने वाली काउंसलिंग को एक दिन में करना उनकी मजबूरी हो गया है। इसके चलते निदेशक कार्यालय में देर रात को दिन जैसी स्थिति बनी रही।
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बोले अधिकारी
संस्थान में हरियाणा के सरकारी, सहायता प्राप्त और प्राईवेट मेडिकल कॉलेजों की एमबीबीएस और बीडीएस की रिक्त सीटों के लिए बुधवार को काउंसिलिंग का आयोजन किया गया है। इसके तहत पीजीआई में सामान्य श्रेणी की छह जमा एक सीट के लिए कांउसिलिंग थी। इसमे से एक सीट सेंट्रल पुल कोटा की एक सीट शामिल थी। इस कोटे के तहत उम्मीदवार ने दिन के समय रिपोर्ट किया, जिस समय तक कांउसिलिंग शुरू हो चुकी थी। उसके आते ही सेंट्रल पुल की अतिरिक्त सीट को हटा लिया गया और किसी भी दुविधा से बचने के लिए मोपअप राउंड की काउंसिलिंग नए सिरे से करी गई। देर रात निजी कॉलेजों की सीटों के लिए काउंसिलिंग जारी है। इसे एमसीआई की गाइड लाइन के हिसाब से भरा जाएगा।
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- डॉ. संजय कुमार, परीक्षा नियंत्रक, हेल्थ यूनिवर्सिटी

सामान्य एवं अन्य सभी श्रेणी की सभी सीट मेरिट के हिसाब से भर दी गई हैं । सभी छात्रों ने अपनी मेरिट के हिसाब से अपनी पसंद की उपलब्ध सीट का चयन किया है। विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित कांउसिलिंग पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ सभी छात्रों के हितों को ध्यान में रखकर आयोजित की जा रही है।
- डॉ. एच.के. अग्रवाल, कुलसचिव, हेल्थ यूनिवर्सिटी
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