रोहतक। शराब का अत्यधिक सेवन, खान-पान में लापरवाही, काला पीलिया व मोटापा मिलकर लोगों का लिवर डैमेज कर रहे हैं। प्रदेश में हर महीने इन चार कारणों की वजह से औसतन 90 लोगों के लिवर जवाब दे रहे हैं। ऐसे मरीजों को लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है। इस पर 20 से 25 लाख रुपये खर्च आने की वजह से मुश्किल से 10 प्रतिशत मरीज की इलाज लेकर जान बचा पाते हैं। शेष रुपये के अभाव में तकलीफ सहने को विवश हैं। ऐसे में लोगों को इस स्थिति तक पहुंचने से रोकना ही बेहतर इलाज है। इसी पर स्वास्थ्य विभाग व विश्व स्वास्थ्य संगठन का जोर है। इसके लिए डब्ल्यूएचओ ने लोगों को जागरूक करने की ओर प्रेरित करने के लिए लिव फॉर लिवर टैग लाइन दी है।
लिवर प्रभावित 100 मरीज रोज आ रहे पीजीआई
पीजीआई के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग की ओपीडी व क्लीनिक में औसतन 200 मरीज रोज आ रहे हैं। इनमें से सौ मरीज लिवर प्रभावित होते हैं। इनमें से 40 मरीज काला पीलिया पीड़ित होते हैं। यही नहीं रोजाना औसतन दस नए लिवर प्रभावित मरीज सामने आ रहे हैं। इतनी बड़ी संख्या में पीलिया व काला पीलिया के मरीजों का सामने आना चिंता का विषय है।
लिवर 80 प्रतिशत डैमेज होने पर ट्रांसप्लांट जरूरी
लिवर समस्या को लेकर मरीज अनजान रहता है। इसकी वजह इस बीमारी के प्रारंभिक लक्षणों का नहीं होना है। लक्षण नहीं होने के कारण बीमारी बढ़ती जाती है। बीमार व्यक्ति का लिवर 80 प्रतिशत डैमेज होने पर उसे लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है। इस पर खर्च 20 से 25 लाख रुपये तक आता है। ऐसी स्थिति में आम आदमी के लिए इलाज लेना मुश्किल होता है।
सावधानी बरत कम कर सकते हैं 50 प्रतिशत बीमारी
लिवर डैमेज होने से बचाया जा सकता है। इसके लिए केवल सावधानी बरत कर ही हम इस बीमारी को 50 प्रतिशत तक कम कर सकते हैं। इसके तहत खान-पान में स्वच्छता बरतने के साथ गर्भवती महिलाओं की जांच कराना जरूरी है। गर्भवती से उसके नवजात शिशु में काला पीलिया होने की करीब 50 प्रतिशत संभावना रहती है। इसके लिए दवा वैक्सीनेशन उपलब्ध है। इसलिए प्रसूता की डिलीवरी अस्पताल में होना जरूरी है।
जीवन रेखा ने फ्री किया काला पीलिया का इलाज
लोगाें को लिवर रोगों के प्रति जागरूक बनाने के उद्देश्य से हर वर्ष 19 अप्रैल को विश्व लिवर दिवस मनाया जाता है। इसी का महत्व समझते हुए केंद्र सरकार ने वर्ष 2018 से नेशनल वायरल हैपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम की शुरुआत की। प्रदेश सरकार की जीवन रेखा योजना की सफलता के चलते केंद्र सरकार ने यह प्रोग्राम शुरू किया। इसके तहत हर प्रकार के पीलिया व काला पीलिया (हैपेटाइटिस ए, बी, सी, डी व ई) के मुफ्त इलाज व जांच का प्रावधान किया गया है। अब देश के हर राज्य में मॉडल ट्रीटमेंट सेंटर बनाए जा रहे हैं। इस अभियान को पीजीआईएमएस के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डॉ. प्रवीण मल्होत्रा ने सफल बनाने में अहम योगदान दिया।
इन बातों का रखें ध्यान
-त्वचा, नाखून व आंखों में पीलापन हो।
-यूरीन में पीलापन नजर आए।
-हाथ जरूर धोएं।
-घर का बना खाना ही खाएं।
-साफ पानी पीएं।
-सुई के बार-बार इस्तेमाल से बचें।
-ग्लूकोज या टीका जरूरी हो तो ही लगवाएं।
-निडिल व सिरिंज काट कर नष्ट करें।
-रक्तदान समय पर जरूर करें।
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पीजीआई में जांच की है नि:शुल्क सुविधा
काला पीलिया का इलाज पूरी तरह फ्री है। पीजीआई में नि:शुल्क जांच की सुविधा भी उपलब्ध है। गैस्टेएंटेलोजी विभाग में फाइब्रोस्कैन, एंडोस्कोपी, क्लोनोस्कोपी, कैप्सूल एंडोस्कोपी, आरगन प्लाज्मा कोगुलेशन की सुविधा है। विभाग की ओपीडी व क्लीनिक में रोजाना 200 मरीज आते हैं। इनमें से दस नए मरीज लिवर प्रभावित होते हैं। विभाग में पिछले आठ वर्षों में 33000 एंडोस्कोपी व 11000 फाइब्रोस्कैन की जांच के अलावा 25 हजार काला पीलिया के मरीजों का इलाज किया जा चुका है। लोगों की लापरवाही व इलाज नहीं लेने के चलते लिवर डैमेज हो जाता है। इसलिए सावधानी बरतना जरूरी है।
-डॉ. प्रवीण मल्होत्रा, एचओडी, गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग, पीजीआईएमएस