सहकारिता मंत्री मनीष कुमार ग्रोवर ने पीजीआईएमएस के आपातकालीन विभाग में 2014 से 2017 के बीच चार साल में एक करोड़ 94 लाख रुपये से अधिक की खरीदी गई लाइफ सेविंग दवाओं के मामले में संज्ञान लेते हुए कुलपति से इस मामले की जांच कराने की बात कही है। सहकारिता मंत्री ने कहा है कि इस खरीद में कहां गड़बड़ी हुई है, इसका खुलासा जांच के बाद ही हो सकता है। इस मामले में वह निष्पक्ष जांच कराने के लिए बात करेंगे।
सूत्रों की मानें तो संस्थान में दवाओं की कमी के साथ महंगी दवाओं की खरीद पर उठे सवाल संस्थान की मुसीबत बढ़ा रहे हैं। इसमें सबसे अहम एक साल में एक करोड़ से अधिक की दवा खरीदना ही सबसे बड़ा सवाल है। विभाग परेशान है कि उनका डाटा कैसे लीक हो गया। गौरतलब है कि पीजीआईएमएस के आपातकालीन विभाग ने चार साल में एक करोड़ 94 लाख की लाइफ सेविंग मेडिसिन खरीदी। इसमें सबसे अहम 2016 में खरीदी गई सवा एक करोड़ से अधिक की दवा है। प्रशासन ने 2014 में 12 लाख 45 हजार 981 रुपये, 2015 में 24 लाख 13 लाख 166 रुपये व 2017 में 36 लाख 32 हजार 241 रुपये की दवा खरीदी गई थी।
कहां से किस भाव में और किससे खरीदी गई दवा
इस मामले में जांचकर्ताओं के लिए सबसे बड़ा सवाल है कि प्रबंधन ने कहां से, किस भाव में और किससे दवाओं की खरीद की है। इसमें सभी दवाएं क्या बाजार भाव से कम मूल्य पर हैं या नहीं। इसमें कुटेशन किस-किस से ली गई हैं आदि सवालों के जवाब तलाशने होंगे। क्योंकि ऐसे ही गोलमाल की पहले भी आपातकालीन विभाग में जांच हो चुकी है। इसेसर्जरी विभाग के एक सीनियर जांच अधिकारी ने जांच के बाद स्टेट विजिलेंस को भेजा था। इसमें दवाओं की कीमत में काफी अंतर बताया जा रहा था।