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मनु ने मां को समर्पित किया गोल्ड, मां ने देश को

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मनु ने मां को समर्पित किया गोल्ड मां ने देश को
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चरखी दादरी।
कॉमनवेल्थ गेम्स की शूटिंग स्पर्धा में जीते गए गोल्ड मेडल को मनु भाकर ने अब तक की सबसे आसान अंतरराष्ट्रीय कामयाबी बताया है। आस्ट्रेलिया से रविवार को चरखी दादरी स्थित अपने निवास स्थान पर पहुंची मनु भाकर ने अमर उजाला प्रतिनिधि से विशेष बातचीत में कॉमनवेल्थ गेम्स की सफलता के अनुभव साझा किए। मनु भाकर ने गोल्ड मेडल अपनी मां सुमेधा भाकर को समर्पित किया है और मां ने ये देश को समर्पित किया है। मनु का कहना है उनकी सफलता में उनके पिता रामकिशन भाकर का भी अहम योगदान है।
अमर उजाला प्रतिनिधि से विशेष बातचीत में मनु ने बताया कि दो साल पहले तक वह जूडो-कराटे खेलती थी लेकिन थांगता में उसके साथ चीटिंग होने के चलते यह गेम खेलना छोड़ दिया। 24 अप्रैल 2016 को मनु ने शूटिंग गेम में हाथ आजमाने के लिए पहली बार हाथ में पिस्टल थामी। मनु के पिता रामकिशन भाकर ने बताया कि पहली बार में मनु का निशाना टारगेट के पास लगा। इसके बाद मनु ने उनसे पिस्टल की मांग की तो उन्होंने उसे जर्मनी से पिस्टल मंगवाकर दी। इसके बाद मनु ने शूटिंग चैंपियनशिप में भाग लेना शुरू किया। महज दो साल के छोटे से कॅरिअर में मनु अब तक 23 राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पदक प्राप्त कर चुकी है। मनु ने बताया कि सीनियर वर्ल्ड कप अब तक का सबसे टफ टूर्नामेंट रहा है। मनु ने बताया कि वह दो साल के कॅरिअर में मनु राष्ट्रीय स्तर पर 11 गोल्ड, तीन सिल्वर व एक ब्रांज मेडल जीत चुकी है जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अब तक वह सात गोल्ड व एक सिल्वर मेडल भी देश को दिला चुकी है।
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एकाग्रता के लिए मां कराती है योगा
मनु भाकर की मां सुमेधा गौरिया स्थित यूनिवर्सल स्कूल में प्राचार्या है। उनकी प्रारंभिक शिक्षा बाढड़ा उपमंडल स्थित पंचगांव गुरुकुल से हुई है। मां सुमेधा का कहना है कि शूटिंग में एकाग्रता की सबसे अधिक जरूरत होती है और इसके लिए वह मनु को योगाभ्यास कराती है। उन्होंने बताया कि सुबह एक घंटे वो मनु व अपने बेटे अखिल के साथ घर पर ही योग करती है।
वर्जन::
बेटी ने जो पदक जीता है वो प्रदेश व देश को समर्पित है। अभिभावकों को अपने बच्चों की कॅरिअर में आगे बढ़ने में मदद करनी चाहिए। जो फील्ड बच्चे को अच्छा लगे उसमें आगे बढ़ने में अभिभावक साथ दें। मुझे अपनी बेटी पर गर्व है।
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सुमेधा भाकर, मनु की मां
वर्जन::
बेटी की इस कामयाबी से बहुत खुशी है लेकिन अभी ओलंपिक का सफर तय करना बाकी है। मनु अब ओलंपिक की तैयारियों में जुट जाएगी। देशवासियों का इतना सम्मान व प्यार देने का मैं शुक्रगुजार हूं।
रामकिशन भाकर, मनु के पिता
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