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किशोर समेत कोरोना के 16 नए संक्रमित केस मिले

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रोहतक। कोरोना संक्रमण एक बार फिर रफ्तार पकड़ने लगा है। जिले में रविवार को एक किशोर समेत 16 नए कोरोना मरीज सामने आए हैं। इसके साथ ही जिले में सक्रिय मरीजों की संख्या बढ़ कर 92 पहुंच गई है। पीजीआई की लैब से हर रोज दस से 15 मरीजों की पुष्टि हो रही है। ऐसे में संक्रमण ने स्वास्थ्य चिंता बढ़ाने का काम किया है। इसके बावजूद पीजीआई में संक्रमित मरीजों की जांच की अलग व्यवस्था नहीं की गई है। इस लापरवाही के चलते एक्सरे व अन्य जांच कराने वाले अन्य मरीजों के बीच महामारी का वाहक बन सकते हैं।
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पीजीआई की ओपीडी में रोजाना करीब छह हजार मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें से करीब तीन हजार नए मरीज होते हैं। इसके अलावा ट्रॉमा सेंटर व आपातकालीन विभाग में भी करीब एक हजार से अधिक मरीज आ रहे हैं। इन्हीं में कोरोना संक्रमित मरीज भी होते हैं। संस्थान में इन मरीजों को भी अन्य रोगों से पीड़ितों के बीच एक्सरे आदि जांच के लिए भेजा जा रहा है। ऐसे में पीजीआई कैंपस में कोरोना आउटब्रेक की स्थिति पैदा होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। संक्रमण फैलने से बड़ी संख्या में स्टाफ के भी चपेट में आने की संभावना है।
पीजीआई के डॉक्टर हुए संक्रमित
कोरोना संक्रमण का खतरा आम आदमी को ही नहीं, चिकित्सकों को भी है। पिछले कुछ दिनों में सामने आए करीब सात चिकित्सकों के संक्रमित होने के मामले भी यही बयान कर रहे हैं। पीजीआई के चिकित्सकों के अलावा अन्य कर्मचारी भी संक्रमित हो चुके हैं। गनीमत यह है कि महामारी नियंत्रण में है। संस्थान के कुछ ही सदस्य संक्रमित हुए हैं।
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पीजीआई में मास्क पहनना हुआ अनिवार्य
महामारी के खतरे को देखते हुए पीजीआई में एक बार फिर मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया गया है। संस्थान के चिकित्सकों के संक्रमित होने पर पीजीआई निदेशक डॉ. ईश्वर सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बैठक कर सभी के लिए मास्क लगाना अनिवार्य कर दिया है। यही नहीं, सी-ब्लॉक को संक्रमित मरीजों की जांच के लिए निर्धारित किया है। पहले उनकी रैपिड जांच की जाती है। इसके बाद अगली कार्रवाई की जाती है। इससे संक्रमण फैलने की संभावना कम होने का दावा किया गया है।
कोरोना के केस आ रहे हैं। संस्थान के कुछ चिकित्सक संक्रमित हुए हैं। ऐसे में संस्थान में मास्क लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। मरीजों के लिए सी-ब्लॉक में अलग व्यवस्था की गई है। यहीं उनकी जांच की जाती है। पहले रैपिड जांच से मरीज की स्थिति देखी जाती है। गंभीर मरीज होने पर उसे वहीं रोक दिया जाता है। महामारी से मिलकर निपटना होगा। इसके लिए संस्थान के साथ अन्य लोगों को भी सहयोग करना होगा।
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डॉ. ईश्वर सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, पीजीआई।
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