रेवाड़ी। जिले में 13 एमएम बारिश होने से सरसों की बिजाई के लिए मौसम अनुकूल हो गया है। विशेषज्ञों ने अब किसानों को बिजाई शुरू करने का सुझाव दिया है। जिले में हर साल औसतन 1.50 से 1.90 लाख एकड़ क्षेत्र में सरसों की बिजाई होती है। हालांकि इस बार रकबा बढ़ने की संभावना है।
मौसम में आए बदलाव के बाद किसानों ने खेत तैयार करने और बीज की व्यवस्था करने की तैयारी शुरू कर दी है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, सरसों की समय पर बिजाई और शुरुआती अवस्था में उचित देखभाल से फसल की बढ़वार और उत्पादन बेहतर रखने में मदद मिलती है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सरसों की बिजाई के लिए दिन का अधिकतम तापमान 30 से 34 डिग्री सेल्सियस के आसपास या इससे कम रहना अनुकूल माना जाता है।
रात का तापमान करीब 15 से 20 डिग्री सेल्सियस रहने पर भी फसल की शुरुआती बढ़वार के लिए अच्छी परिस्थितियां बनती हैं। हालांकि, बीज के अंकुरण के लिए मिट्टी का तापमान और उसमें मौजूद नमी भी महत्वपूर्ण हैं। 20 अक्तूबर तक सरसों बिजाई का समय उपयुक्त माना गया है। अगेती सरसों की बिजाई कर सकते हैं।
बारिश के बाद खेत में नमी होने का मतलब यह नहीं है कि किसान बिना जांच किए बिजाई शुरू कर दें। खेत में नमी उचित होनी चाहिए और पानी जमा नहीं होना चाहिए। अधिक गीली जमीन में बिजाई करने से अंकुरण प्रभावित हो सकता है। खेत की मिट्टी की स्थिति देखकर ही ट्रैक्टर चलाना चाहिए और खेत को भुरभुरा बनाकर तैयार करना चाहिए। सरसों की बिजाई के लिए प्रमाणित बीज का इस्तेमाल करना चाहिए।
मिट्टी की जांच के बाद करें खाद का इस्तेमाल
खाद का इस्तेमाल मिट्टी की जांच और कृषि विभाग के सलाह के अनुसार करना चाहिए। जिन खेतों में पर्याप्त नमी है, वहां किसानों बिजाई की जा सकती है लेकिन कम नमी वाले खेतों में सिंचाई करना आवश्यक है। हालांकि जिले में किसानों की ओर से पहले से ही सरसों बिजाई के लिए खेतों को तैयार कर लिया था और मौसम अनुकूल होने का इंतजार था। पिछले दो दिनों के दौरान क्षेत्र में हुई 13 एमएम बारिश से अब सरसों बिजाई शुरू हो सकेगी। 25 अक्तूबर तक अधिकांश बिजाई पूरी करने की संभावना है। बिजाई से पूर्व किसान मौसम पूर्व अनुमान का भी ध्यान रखें।
वर्जन:
सरसों की बिजाई के लिए मौसम अनुकूल है। पहले से तैयार खेतों में नमी की मात्रा उचित है तो किसान बिजाई कर सकते हैं। तापमान और मौसम की स्थिति पर नजर रखते हुए बिजाई करें। गुणवत्ता युक्त एवं उपचारित बीज का प्रयोग करें। बीज विक्रेता से बिल अवश्य लें। बिल पर जांच लें कि सही किस्म, लॉट नंबर व पूरा विवरण अंकित है। - डॉ. मनोज कुमार, तकनीकी अधिकारी, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग रेवाड़ी।
-जिले में सरसों का वर्षवार क्षेत्रफल और उत्पादन:
वर्ष क्षेत्रफल उत्पादन
2000-01 54,000 96,000
2001-02 67,000 113,000
2002-03 66,000 80,000
2003-04 65,000 107,000
2004-05 72,000 101,000
2005-06 75,000 114,000
2006-07 66,000 92,400
2007-08 64,000 108,800
2008-09 66,000 131,000
2009-10 65,000 119,000
2010-11 63,000 125,000
2011-12 64,000 118,000
2012-13 67,000 145,000
2013-14 66,000 123,000
2014-15 63,000 97,000
2015-16 63,000 116,000
2016-17 63,500 142,400
2017-18 66,300 152,200
2018-19 71,800 164,900
2019-20 77,900 140,600
2020-21 76,200 174,500
2021-22- 85,120- 165,900
2022-23 -80,210 155,030
2023-24 81,850- 185,660
2024-25- 76,630- 161,750
2025-26- 80,960- 187,820