सिविल अस्पताल में क्यूआर कोड जारी करते स्टाफ सदस्य। स्रोत : प्रशासन
रेवाड़ी। जिले के सरकारी अस्पतालों में अब ऑनलाइन भुगतान की व्यवस्था शुरू की गई है। ऐसे में अब मरीजों को ओपीडी पर्ची बनवाने, इमरजेंसी बिलिंग और लैब में जांच के लिए निर्धारित शुल्क का भुगतान करने के लिए नकदी लेकर चलने की मजबूरी नहीं होगी। नागरिक अस्पताल समेत सभी स्वास्थ्य संस्थानों में मरीज क्यूआर कोड स्कैन कर डिजिटल भुगतान कर सकेंगे।
स्वास्थ्य विभाग की इस पहल का उद्देश्य मरीजों को भुगतान की प्रक्रिया में सहूलियत देना और सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देना है। नई व्यवस्था लागू होने से अस्पतालों में आने वाले मरीजों को शुल्क जमा कराने के लिए नकदी का इंतजाम करने की परेशानी से राहत मिलने की उम्मीद है। खासकर उन मरीजों और उनके परिजनों को इससे सुविधा मिलेगी, जिन्हें अचानक इमरजेंसी में अस्पताल पहुंचना पड़ता है।
सिविल सर्जन डॉ. नरेंद्र दहिया ने बताया कि जिले के स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए क्यूआर कोड से डिजिटल भुगतान की व्यवस्था की गई है। इसके तहत ओपीडी, इमरजेंसी बिलिंग और लैब जांच बिलिंग काउंटर पर क्यूआर कोड प्रदर्शित किए जाएंगे। मरीज इन कोड को स्कैन करके संबंधित सेवाओं के लिए निर्धारित शुल्क का भुगतान कर सकेंगे।
सरकारी अस्पतालों में मरीजों को उपचार के लिए ओपीडी पर्ची बनवाने और विभिन्न प्रकार की जांच करवाने के दौरान निर्धारित शुल्क जमा कराना पड़ता है। अब इस प्रक्रिया में डिजिटल भुगतान का विकल्प उपलब्ध होने से मरीज अपनी सुविधानुसार भुगतान कर सकेंगे। इससे नकदी पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलेगी।
सुरक्षित और पारदर्शी भुगतान पर जोर
सिविल सर्जन डॉ. नरेंद्र दहिया ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने से भुगतान प्रक्रिया को सरल, सुविधाजनक और पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी। मरीजों और उनके परिजनों को शुल्क जमा कराने के लिए नकदी साथ रखने की जरूरत भी कम होगी। उन्होंने सभी संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे क्यूआर कोड से भुगतान की व्यवस्था को सुचारु रूप से लागू करना सुनिश्चित करें। इसका उद्देश्य यह है कि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने आने वाले नागरिकों को भुगतान के दौरान किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।