रेवाड़ी। दिल्ली-जयपुर हाईवे पर जिले की सीमा कापड़ीवास बार्डर से जयसिंहपुर खेड़ा तक लगभग 45 किलोमीटर की दूरी में कहीं भी पीली पट्टी नहीं है। सफेद पट्टियां भी धुंधली हो चुकी हैं। ऐसे में कोहरे में यह सड़क खतरे से खाली नहीं है। रेवाड़ी-नारनौल रोड पर कुंड से काठूवास तक सात किलोमीटर सड़क भी पीली पट्टी रहित है।
पीली पट्टी रहित इन मुख्य मार्गों पर कई अवैध कट बने हुए हैं। पीली पट्टी नहीं होने की स्थिति में यह अनुमान नहीं लग पाता कि कहां लेन को पार सकते हैं, कहां नहीं। इन परेशानियों के बीच जिले से निकलने वाले मुख्य मार्गों पर बनाए गए अवैध कट जान पर आफत बने हुए हैं। इन कटों पर शाॅर्टकट के प्रयास में कई हादसे हो चुके हैं। अकेले दिल्ली-जयपुर हाईवे पर जिले की सीमा में कापड़ीवास बाॅर्डर से जयसिंहपुर खेड़ा तक 45 किलोमीटर की दूरी में 15 से अधिक अवैध कट हैं।
इन अवैध व शाॅर्टकट के प्रयास में अब तक 10 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। रेवाड़ी से राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 48, रेवाड़ी से जैसलमेर और रेवाड़ी से रोहतक हाईवे गुजर रहे हैं। इसके अलावा गुरुग्राम से वाया पटौदी-रेवाड़ी को भी राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित किया जा चुका है।
रेवाड़ी-लोहारू, रेवाड़ी-सोहना स्टेट हाईवे भी रेवाड़ी से होकर ही गुजरते हैं। इन राष्ट्रीय राजमार्ग हादसे संख्या 48, राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-11 और 71 पर आए दिन हादसे होते हैं। औसतन हर माह 10 से 12 हादसे हो रहे हैं, जिनमें 5 से 7 लोगों की औसतन जान जा रही है।
12 किलोमीटर में 31 अवैध कट
अधिकतर हाईवे से पीली पट्टी गायब है। सफेद पट्टी भी मिट रही है। दिल्ली–जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर 48 पर जयसिंहपुर बॉर्डर से लेकर कसोला चौक तक 12 किलोमीटर लंबे मार्ग पर दोनों तरफ 31 से अधिक अवैध कट बने हुए हैं, जिनसे आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं और कई लोगों की जान जा चुकी हैं। स्थानीय ढाबा संचालकों, दुकानदारों और पेट्रोल पंप मालिकों ने अपनी सुविधानुसार सड़क के दोनों ओर अवैध कट बना लिए हैं। इससे वाहन अचानक निकलते हैं और तेज रफ्तार में चल रहे वाहनों का संतुलन बिगड़ जाता है। कोहरे के दौरान हादसे होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
इन स्थानों पर बनाए अवैध कट
दिल्ली-जयपुर नेशनल हाईवे पर मालपुरा के समीप, बेस्टेक माल, सालावास के समीप, आसलवास के समीप, निखरी, रूध के समीप, ओढी के समीप, चांदुवास के समीप व जयसिंहपुरा खेड़ा के समीप व नेशनल राजमार्ग संख्या-71 पर बांबड, मीरपुर रोड, बीकानेर के पास टोल टैक्स से पहले कट व पाल्हावास समेत अनेक कटों के चलते हादसे हो रहे हैं। इसके अलावा रेवाड़ी-जेसलमेर हाईवे पर हरीनगर के समीप, खोरी के समीप, बवाना गुर्जर, टींट के समीप व पाडला के समीप लोगों ने अपनी सुविधानुसार कट बना रखे हैं।
सड़क हादसों में हर वर्ष होती हैं मौतें
सड़क दुर्घटना में 2020 में 271 लोगों की मृत्यु हुई थी और 631 घायल हुए थे। 2022 में 211 लोगों की मृत्यु और 500 लोग घायल हुए थे। 2023 में 227 लोगों की मौत और 514 लोग घायल हुए थे। 2024 में 210 लोगों की मृत्यु और 765 लोग घायल हुए थे। 2025 में अभी तक 150 से अधिक लोगों की मौत व 300 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं।
दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर जगह-जगह अवैध कट बनने के साथ ही सुरक्षा के पर्याप्त उपाय भी नहीं किए गए हैं, जिसके कारण बड़े हादसों की आशंका लगातार बढ़ती जा रही है। प्रशासन को इस दिशा में तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए, क्योंकि थोड़ी सी अनदेखी भी किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।
- दिनेश, कालड़ावास
ठंड के मौसम में कोहरा बढ़ने से हाईवे पर दृश्यता कम हो जाती है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे समय में सड़क पर पीली पट्टियां और चेतावनी बोर्ड होना बेहद जरूरी है, लेकिन हाईवे पर ये व्यवस्थाएं गायब हैं। पीली पट्टियां और सुरक्षा संकेतक न होने से वाहन चालक खतरे को समय पर भांप नहीं पाते और ओवरटेकिंग के दौरान हादसे हो जाते हैं।
- प्रेम चंद, नैहचाना
हाईवे पर कई स्थानों पर ढाबा संचालकों और दुकानदारों ने अपनी सुविधा के अनुसार कट खोल दिए हैं, जिससे तेज रफ्तार में चल रहे वाहनों का संतुलन बिगड़ जाता है। प्रशासन द्वारा समय-समय पर कार्रवाई के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई समाधान दिखाई नहीं देता। कई जगह सफेद पट्टी भी धूमिल हो चुकी है।
- ईश्वर सिंह, बावल
वर्जन:
सर्दी के मौसम को देखते हुए सड़कों एवं राजमार्गों पर सफेद, पीली पट्टियां, साइन बोर्ड, मार्किंग के आदेश दिए जा चुके हैं। जहां पर अवैध कट हैं, उन्हें बंद कराने को लेकर अधिकारियों को कहा गया है। पिछले दिनों सभी विभागों की इसी संबंध में मीटिंग भी ली गई थी, साथ ही सख्त आदेश जारी किए गए हैं।
- अभिषेक मीणा, डीसी
दिनेश, कालड़ावास
दिनेश, कालड़ावास
दिनेश, कालड़ावास
दिनेश, कालड़ावास
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