पशुओं को मुंहखुर बीमारी से बचाने के लिए पशुपालन विभाग द्वारा हर साल टीकाकरण अभियान चलाया जाता है। छह महीने पहले घोषणा भी हुई थी कि पूरे प्रदेश में अभियान चलाया जाएगा। जिसमें रेवाड़ी जिला भी शामिल था, लेकिन टीके की सप्लाई नहीं होने के कारण यह अभियान ठंडे बस्ते में जाता हुआ दिखाई दे रहा है। स्थानीय अधिकारियों की मजबूरी भी है कि उनके पास पशुओं को लगाने के लिए टीके तक नहीं है। स्थानीय विभाग द्वारा चार बार पत्र लिखा जा चुका है कि जल्द से जल्द मुंहखुर बीमारी रोकने के लिए टीके की सप्लाई की जाए, लेकिन अभी तक कोई कुछ नहीं हुआ है। हालांकि कुछ राहत ये है कि स्थानीय अधिकारियों के पास एक पत्र अवश्य आया है, जिसमें कहा गया है कि अगले 20 से 25 दिनों में टीके की सप्लाई शुरू कर दी जाएगी। ऐसे में अगले महीने से जिले में पशुओं को मुंहखुर बीमारी से बचाने के लिए बड़े स्तर पर टीकाकरण अभियान चलेगा।
टीका सप्लाई होने में छह महीने की हुई देरी
इस बार पशुओं को मुंहखु र(एफएमडी) के टीके लगने में 6 महीने से अधिक की देरी हो चुकी है। इसका बड़ा कारण हरियाणा के पशु अस्पतालों में मुंहखुर के टीके की सप्लाई न होना है। पशुओं में मुंहखुर के टीके न लगने से पशुपालक काफी परेशान हैं। क्योंकि बरसाती दिनों में पशुओं में मुंहखुर फैलने का खतरा बढ़ जाता है। जिले में पशुओ का मुंहखुर का टीकाकरण नहीं होने से रोष पाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पहले भी पशुओं में मुंहखुर बीमारी फैलती रही है। जिससे काफी संख्या में पशुओं की मौत भी हुई है। 6 महीने का समय बीत चुका है। अभी तक उनके पशुओं को मुंहखुर का टीकाकरण नहीं लगा है। उनका डर लगातार बढ़ता जा रहा है। इसलिए सरकार को जल्दी से जल्दी पशुओं को मुंहखुर के टीके लगाने चाहिए।
रोग के लक्षण
पशु के मुंह से अत्यधिक लार का टपकना
जीभ और तलवे पर छालों का उभरना एवं जीभ का बाहर आ जाना
पशु के जुगाली करना बंद कर देना
दूध उत्पादन में करीब 80 प्रतिशत की कमी।
पशुओं का गर्भपात होना।
बछड़ों में अत्यधिक बुखार आने पर मृत्यु हो जाना।
ऐसे करें बचाव
रोग का पता लगने पर पशु को अन्य पशुओं से तुरंत दूर किया जाए
दूध निकालने वाले व्यक्ति को हाथ और मुंह साबुन से धोना चाहिए
प्रभावित क्षेत्र को सोडियम कार्बोनेट घोल पानी मिलाकर धोना चाहिए
चिकित्सकों की सलाह लेकर पशु के तुरंत टीका लगवाने के साथ नियमित उपचार कराएं।
स्वस्थ एवं बीमार पशु को अलग-अलग रखें
पशु के ठीक हो जाने पर 20 दिन बाद ही उसे दूसरे पशुओं के पास लाना चाहिए।
जिले में 2 लाख 33 हजार पशु है। टीके लगाने के लिए सरकार की तरफ आर्डर आ चुके है। उम्मीद है कि 25 अक्तूबर से पशुओं को टीके लगने शुरू हो जाएंगे। जिसके बाद अभियान शुरू किया जाएगा। बीमे को लेकर अभी कोई सूचना नहीं आई है। -डॉ. नसीब सिंह, उप निदेशक, पशुपालन एवं डेयरी विभाग।