सरकारी राशन की दुकानों पर गरीबों को सड़ा-गला गेहूं बांट जा रहा है। गरीब इस गेहूं को खाने के लिए मजबूर हैं। यह गड़बड़ी उपभोक्ताओं की शिकायत पर की गई जांच में सामने आई है। डिपो पर उपभोक्ताओं को खराब गेहूं बांटा जा रहा है, जिसे रुकवा दिया गया। इतना ही नहीं डिपो को ताला भी लगा दिया गया।
कें द्र और प्रदेश की सरकार भले ही गरीबों को सार्वजनिक राशन वितरण प्रणाली का भरपूर लाभ दे रही है, लेकिन अधिकारी हैं कि सरकार की नीतियों को हवा में उड़ा रहे हैं। मेहनत, मजदूरी करके अपने परिवार का गुजारा करने वाले गरीब और जरूरतमंद लोग आज भी गला-सड़ा अनाज खाने के लिए मजबूर हैं। जो अनाज पशुओं को खिलाने के लायक नहीं माना जाता है उनको राशन डिपो पर सप्लाई किया जा रहा है। ये गेहूं पांच माह पहले आए ताऊ-ते तूफान में हुई बारिश में भीग गया था, जिसे कोसली अनाज मंडी में खुले आसमान के नीचे रखा गया था। इसकी जांच के आदेश भी उपायुक्त यशेंद्र सिंह ने दिए थे। भीगे गेहूं का सैंपल भी लेकर जांच के लिए भेजा गया था।
सूत्रों की माने तो जांच के उपरांत आई रिपोर्ट में आधे से ज्यादा सैंप फेल पाए गए हैं, लेकिन अधिकारियों के सा मिलीभगत कर एफसीआई ने इस गेहूं का उठान शुरू करवा दिया। अब नमीयुक्त और गला-सड़ा यह गेहूं राशन डिपो तक पहुंच रहा है। डिपोधारकों और ग्राहकों की ओर से लगातार मिल रही शिकायतों के बाद सहायक खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी ने एक राशन डिपो का औचक निरीक्षण किया तो वहां से सड़ा-गला और नमीयुक्त गेहूं मिला। इस पर अधिकारी ने न सिर्फ इस गेहूं की सैंपलिंग कराने के लिए फूड सेफ्टी ऑफिसर से बात की, बल्कि डिपो पर ताला लगवाते हुए सैंपल होने तक डिपोधारक को राशन वितरण के लिए भी मना कर दिया है।
अधिकारी की माने तो कोसली अनाज मंडी से सप्लाई हो रहा ये गेहूं न केवल नमीयुक्त है, बल्कि खाने योग्य भी नहीं है। उन्होंने सप्लाई को लेकर एफसीआई की कार्यशैली पर भी सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि सप्लाई से पहले क्वालिटी चेक करना एफसीआई का काम है। अब किस आधार पर इस गेहूं का आरओ काटा गया है, इसका जवाब तो एफसीआई ही दे सकती है।
वहीं डिपोधारक का कहना है कि विभाग ने रात के अंधेरे में गाड़ी भेजकर गेहूं उतारा है। सुबह बैग खोलने पर पता चला कि गेहूं पूरी तरह से खराब और नमीयुक्त है। वही इसे लेकर कार्डधारकों में भी शासन और प्रशासन के प्रति रोष है कि शिकायत के बावजूद उन्हें गला-सड़ा गेहूं परोसा जा रहा है। उन्होंने कहा साहब, गीला और बदबूदार गेहूं खाने लायक तो है नहीं, लेकिन हम गरीब लोग हैं। अब सरकार जैसा गेहूं देगी, खाना तो पड़ेगा ही। मगर कुछ भी हो, यहां हैरान करने वाली बात यह है कि गरीब तो गरीब, खुद अधिकारी मान रहे हैं कि यह गेहूं खाने योग्य नहीं है। मगर इसे गरीबों का निवाला बनने के लिए क्यों भेजा जा रहा है, इसका जवाब तो शासन और प्रशासन ही दे सकता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कुछ संज्ञान लेता है।
शिकायतें मिलने पर जांच की तो गेहूं खाने लायक नहीं निकला
दो कट्टे खोलकर जांच की तो गेहूं खाने लायक नहीं मिला गेहूं कोसली अनाज मंडी से आया है। इसकी जांच के लिए उच्च अधिकारियों से बात करेंगे। -जय यादव, सहायक खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी
कट्टे में रखा खराब गेहूं। संवाद- फोटो : Rewari